पंजाब 1980 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
INC(I): 63 सीटें (53.8%)SAD: 37 सीटें (31.6%)CPI: 9 सीटें (7.7%)CPM: 5 सीटें (4.3%)IND: 2 सीटें (1.7%)BJP: 1 सीट (0.9%)बहुमत के लिए 59117सरकार बनाने के लिए 59
  • INC(I)6353.8%
  • SAD3731.6%
  • CPI97.7%
  • CPM54.3%
  • निर्दलीय21.7%
  • BJP10.9%
चुनाव की कहानी

कांग्रेस की वापसी, मामूली बढ़त से

क्या हुआ

राज्य की सरकार एक बार फिर बदल गई।

इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) ने 117 में से 63 सीटें जीतीं, जो अकेले सरकार बनाने के लिए ज़रूरी आँकड़े से थोड़ा ही ज़्यादा था।

शिरोमणि अकाली दल 37 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर खिसक गई।

इससे जीतने वाली पार्टी अकेले सरकार बनाने के लिए ज़रूरी आँकड़े से 4 सीटें आगे रही।

क्या बदला

इस चुनाव में सबसे साफ़ बदलाव राज्य के दो सबसे बड़े दलों के बीच हुआ।

20 सीटें शिअद से इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) के पास गईं; उस साल किन्हीं और दो दलों के बीच इतनी सीटें नहीं बदलीं।

अकेले यही बदलाव विधान सभा पर नियंत्रण पलटने के लिए काफ़ी था।

अहम आँकड़े

उस मतगणना के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।

सबसे कड़ा मुक़ाबला बाघा पुराना, पंजाब में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 123 वोटों से हुआ।

इस चुनाव का सबसे ज़्यादा नाभा, पंजाब में दर्ज हुआ, 79.0%।

इस चुनाव का सबसे भरा हुआ बैलट जालंधर मध्य, पंजाब में था, जहाँ 14 उम्मीदवार मैदान में थे।

पृष्ठभूमि

मतगणना के बाद निर्दलीयों और छोटे दलों के पास भी कुछ सीटें रहीं।

2 सीटें निर्दलीयों को मिलीं।

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RBI 2024-25

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