मोरिंडाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1980
रवि इन्द्र सिंह (SAD) ने 1980 के विधान सभा चुनाव में 52.0% वोट पाकर मोरिंडा सीट जीती और रणधीर सिंह (INC(I)) को 4,258 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 68 कूम कलां थी। 2007 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2012 से सीट नंबर 68 दाखा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
7.5% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | रवि इन्द्र सिंह | 29,45652.0% | |
| 2 | रणधीर सिंह | 25,19844.5% | |
| 3 | संतोख सिंह पुत्र भगवान सिंह JNP(SC) | JNP(SC) | 7541.3% |
| 4 | संतोख सिंह पुत्र चरण सिंह JNP(SR) | JNP(SR) | 6141.1% |
| 5 | हरगोपाल सिंह JNP(JP) | JNP(JP) | 3640.6% |
| 6 | सुरिंदर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1290.2% |
| 7 | लाल सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1270.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
SAD और INC(I) को 96% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.13 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
मोरिंडा से कौन जीता, 1977–2007
SAD ने 1977 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 55.3% से घटकर 52.0% रह गया। मतदान प्रतिशत 1977 के 68.0% से घटकर 66.3% रह गया। इसके बाद 1985 के चुनाव में भी SAD ने यह सीट अपने पास रखी।