कांग्रेस की तीसरी जीत
क्या हुआ
सत्ताधारी पार्टी ने पंजाब में फिर आराम से बहुमत जीता, पहले से कम सीटों के साथ।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 154 सीटों में से 90 सीटें हासिल कीं।
यह अकेले सरकार चलाने के लिए ज़रूरी 78 सीटों से आराम से ज़्यादा था।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी अकाली दल सिर्फ़ 19 सीटें जीत सकी।
कांग्रेस के (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 43.7% रहा।
क्या बदला
इस जीत से राज्य में किसी एक पार्टी का अब तक का सबसे लंबा सिलसिला और आगे बढ़ा।
कांग्रेस अब यहाँ लगातार 3 चुनाव जीत चुकी है।
फिर भी नए दलों के विधान सभा में आने से उसकी अपनी सीटें 120 से घटकर 90 रह गईं।
पहली बार जीतने वालों में अकाली दल, सोशलिस्ट पार्टी, स्वतंत्र पार्टी और हरियाणा लोक समिति भी थे।
अहम आँकड़े
उस मतगणना में कुछ सीटों के परिणाम अलग से ध्यान खींचते हैं।
मतगणना का सबसे कड़ा मुक़ाबला लंबी, पंजाब में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 11 वोट रहा।
दूसरी तरफ़, अजनाला, पंजाब में विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 46.7% वोट आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) लुधियाना शहर, पंजाब में रहा, 78.9%।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला तोशाम, पंजाब में था, जहाँ एक सीट के लिए 13 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
इस समय तक पंजाब में उसका दौर राज्य के अब तक के पूरे चुनावी इतिहास में फैला हुआ था।