मल्लांवालाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1951–52
प्रताप सिंह (निर्दलीय) ने 1951–52 के विधान सभा चुनाव में 27.9% वोट पाकर मल्लांवाला सीट जीती और ज्वाला सिंह (INC) को 388 वोटों से हराया।
1951 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 से सीट नंबर 80 धारीवाल है।
विजेता
मल्लांवाला का फ़ैसला सिर्फ़ 1.5% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 388 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | प्रताप सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 7,29627.9% |
| 2 | ज्वाला सिंह | 6,90826.4% | |
| 3 | दरबारा सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 6,88926.4% |
| 4 | सच्चिदा नाथ निर्दलीय | निर्दलीय | 2,5629.8% |
| 5 | किशन सिंह | 1,3715.3% | |
| 6 | प्रीतम सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 5652.2% |
| 7 | थाना सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3461.3% |
| 8 | राजिंदर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2020.8% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 81% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.34 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।