धूरीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1997
धनवंत सिंह (निर्दलीय) ने 1997 के विधान सभा चुनाव में 31.3% वोट पाकर धूरी सीट जीती और सुरिंदर सिंह (SAD) को 3,691 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 80 पटियाला थी। 2007 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2012 से सीट नंबर 80 फाजिल्का है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। धनवंत सिंह 4.0% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | धनवंत सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 28,98831.3% |
| 2 | सुरिंदर सिंह BJP-SAD Alliance (Punjab, 1997) | BJP-SAD Alliance (Punjab, 1997) | 25,29727.3% |
| 3 | मनप्रीत सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 15,62616.9% |
| 4 | भोला | 10,81411.7% | |
| 5 | भान सिंह भौरा संयुक्त मोर्चा | संयुक्त मोर्चा | 10,35311.2% |
| 6 | सुखपाल सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 8360.9% |
| 7 | मोहन लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 4660.5% |
| 8 | ज्ञान चन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 3600.4% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 75% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.41 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
धूरी से कौन जीता, 1977–2007
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1992 में जीता था। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1992 के 10.4% से बढ़कर 73.4% हो गया। इसके बाद 2002 के चुनाव में यह सीट SAD ने जीती।