रायकोटविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1997
हरमोहिंदर सिंह प्रधान (INC) ने 1997 के विधान सभा चुनाव में 42.7% वोट पाकर रायकोट सीट जीती और रंजीत सिंह तलवंडी (SAD) को 4,052 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 54 करतारपुर थी। 2007 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2012 से सीट नंबर 54 बस्सी पठाना है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। हरमोहिंदर सिंह प्रधान 4.5% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | हरमोहिंदर सिंह प्रधान | 38,29742.7% | |
| 2 | रंजीत सिंह तलवंडी BJP-SAD Alliance (Punjab, 1997) | BJP-SAD Alliance (Punjab, 1997) | 34,24538.1% |
| 3 | परमजीत सिंह राणू | 7,0067.8% | |
| 4 | निर्मल सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 4,1984.7% |
| 5 | रछपाल सिंह संयुक्त मोर्चा | संयुक्त मोर्चा | 2,4212.7% |
| 6 | राजविंदर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2,4142.7% |
| 7 | हरदेव सिंह संधू निर्दलीय | निर्दलीय | 9571.1% |
| 8 | तालिब सिंह | 2440.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC, SAD और BSP को 89% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.96 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
रायकोट से कौन जीता, 1977–2007
INC ने 1992 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 60.5% से घटकर 42.7% रह गया। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1992 के 6.7% से बढ़कर 72.4% हो गया। इसके बाद 2002 के चुनाव में यह सीट SAD ने जीती।
- 1977देव राज सिंह (SAD), जीत का अंतर 7.9%
- 1980जगदेव सिंह (INC(I)), जीत का अंतर 4.5%
- 1985तालिब सिंह (SAD), जीत का अंतर 20.9%
- 1992निर्मल सिंह (INC), जीत का अंतर 21.0%
- 1997हरमोहिंदर सिंह प्रधान (INC), जीत का अंतर 4.5%
- 2002रंजीत सिंह तलवंडी (SAD), जीत का अंतर 7.1%
- 2007हरमोहिंदर सिंह (प्रधान) (INC), जीत का अंतर 2.4%