रामपुरा फूलविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
सुखदेव सिंह (SAD) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 45.8% वोट पाकर रामपुरा फूल सीट जीती और बाबू सिंह (CPI) को 8,332 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में कोई सीट नंबर 113 नहीं थी। 2007 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2012 से सीट नंबर 113 घनौर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
14.3% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | सुखदेव सिंह Akali (Shiromani Akali Dal) | Akali (Shiromani Akali Dal) | 26,67145.8% |
| 2 | बाबू सिंह वाम दल | वाम दल | 18,33931.5% |
| 3 | सुरजीत कौर | 10,32117.7% | |
| 4 | मांगू सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1,5912.7% |
| 5 | राम चन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0271.8% |
| 6 | मोहन सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3290.6% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
SAD, CPI और INC को 95% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.93 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
रामपुरा फूल से कौन जीता, 1977–2007
SAD ने यह सीट CPI से छीन ली, जिसने इसे 1980 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह SAD की पहली जीत थी। मतदान प्रतिशत 1980 के 69.9% से घटकर 62.8% रह गया। इसके बाद 1992 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।