रामपुरा फूलविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2002
गुरप्रीत सिंह कांगरू (निर्दलीय) ने 2002 के विधान सभा चुनाव में 39.9% वोट पाकर रामपुरा फूल सीट जीती और सिकन्दर सिंह मलूका (SAD) को 2,659 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में कोई सीट नंबर 113 नहीं थी। 2007 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2012 से सीट नंबर 113 घनौर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। गुरप्रीत सिंह कांगरू 2.6% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | गुरप्रीत सिंह कांगरू निर्दलीय | निर्दलीय | 40,30339.9% |
| 2 | सिकन्दर सिंह मलूका NDA | NDA | 37,64437.3% |
| 3 | हरबंस सिंह सिद्धू | 17,13817.0% | |
| 4 | सुरजीत सिंह भाई रूपा | 2,0252.0% | |
| 5 | नछतर सिंह LBP | LBP | 1,5911.6% |
| 6 | अजायब सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 8290.8% |
| 7 | बख्शदीप सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 5840.6% |
| 8 | गुरप्रीत सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 5090.5% |
| 9 | परगट सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 4080.4% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 94% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.05 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
रामपुरा फूल से कौन जीता, 1977–2007
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट SAD से छीन ली, जिसने इसे 1997 में जीता था। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत लगभग 1997 जितना ही रहा: 73.2%। इसके बाद 2007 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।