दाखाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
बसंत सिंह (SAD) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 56.5% वोट पाकर दाखा सीट जीती और मोहिंदर सिंह (INC) को 15,982 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 55 जमशेर थी। 2007 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2012 से सीट नंबर 55 फतेहगढ़ साहिब है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — बसंत सिंह 22.9% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | बसंत सिंह Akali (Shiromani Akali Dal) | Akali (Shiromani Akali Dal) | 39,51156.5% |
| 2 | मोहिंदर सिंह | 23,52933.6% | |
| 3 | सोहन सिंह वाम दल | वाम दल | 5,0017.2% |
| 4 | बलदेव सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1,3221.9% |
| 5 | करनैल सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3240.5% |
| 6 | राम सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2370.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
SAD और INC को 90% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.28 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
दाखा से कौन जीता, 1977–2007
1977 से यहाँ हर चुनाव SAD ने जीता है: यह लगातार उसकी तीसरी जीत थी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 52.4% से बढ़कर 56.5% हो गया। मतदान प्रतिशत 1980 के 58.1% से बढ़कर 61.4% हो गया। इसके बाद 1992 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।