फिरोजपुर कैंटविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
मोहिंदर सिंह (SAD) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 48.2% वोट पाकर फिरोजपुर कैंट सीट जीती और गुरनैब सिंह बरार (INC) को 1,126 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 96 बुढलाडा थी। 2007 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2012 से सीट नंबर 96 मानसा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
फिरोजपुर कैंट का फ़ैसला सिर्फ़ 1.9% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 1,126 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | मोहिंदर सिंह Akali (Shiromani Akali Dal) | Akali (Shiromani Akali Dal) | 27,84748.2% |
| 2 | गुरनैब सिंह बरार | 26,72146.2% | |
| 3 | हेलीम नासरी निर्दलीय | निर्दलीय | 1,7883.1% |
| 4 | तेजी डूबी निर्दलीय | निर्दलीय | 5010.9% |
| 5 | बलदेव राज निर्दलीय | निर्दलीय | 5010.9% |
| 6 | जसवंत सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2730.5% |
| 7 | अमृत सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1610.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
SAD और INC को 94% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.24 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
फिरोजपुर कैंट से कौन जीता, 1977–2007
SAD ने यह सीट INC(I) से छीन ली, जिसने इसे 1980 में जीता था; SAD ने यहाँ पिछली बार 1977 में जीत दर्ज की थी। मतदान प्रतिशत 1980 के 71.4% से घटकर 68.5% रह गया। इसके बाद 1992 के चुनाव में यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।