फिरोजपुर कैंटविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1992
रविन्द्र सिंह (निर्दलीय) ने 1992 के विधान सभा चुनाव में 43.4% वोट पाकर फिरोजपुर कैंट सीट जीती और गुरनैब सिंह (INC) को 1,546 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 96 बुढलाडा थी। 2007 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2012 से सीट नंबर 96 मानसा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। रविन्द्र सिंह 3.8% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
3 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | रविन्द्र सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 17,89143.4% |
| 2 | गुरनैब सिंह | 16,34539.6% | |
| 3 | लाल सिंह | 7,01217.0% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
एक निर्दलीय, INC और BSP को 100% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.67 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
फिरोजपुर कैंट से कौन जीता, 1977–2007
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट SAD से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1985 के 68.5% से घटकर 41.8% रह गया। इसके बाद 1997 के चुनाव में यह सीट SAD ने जीती।