असम 2021 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
BJP: 60 सीटें (47.6%)INC: 29 सीटें (23.0%)AIUDF: 16 सीटें (12.7%)AGP: 9 सीटें (7.1%)UPPL: 6 सीटें (4.8%)BOPF: 4 सीटें (3.2%)CPM: 1 सीट (0.8%)IND: 1 सीट (0.8%)बहुमत के लिए 64126सरकार बनाने के लिए 64
चुनाव की कहानी

असम में भाजपा को लगातार दूसरा कार्यकाल

क्या हुआ

भारतीय जनता पार्टी ने असम में सरकार चलाने का दूसरा कार्यकाल जीता और ठीक अपनी पिछली सीटों के बराबर सीटें जीतीं।

उसने 126 में से 60 सीटें जीतीं, फिर भी अकेले दम पर बहुमत से पीछे रही।

उसने फिर सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार चलाई, जिनके पास मिलाकर 59.5% सीटें थीं।

उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी इंडियन नेशनल कांग्रेस 29.7% वोट और 29 सीटों के साथ पीछे रही।

ख़ुद भाजपा को 33.2% वोट मिले, जो राज्य में सबसे आगे रहने के लिए काफ़ी था, पर सहयोगी दलों के बिना सरकार चलाने के लिए नहीं।

चुनाव प्रचार

नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोधी कार्यकर्ता अखिल गोगोई, जो दिसंबर 2019 में गिरफ़्तारी के बाद से यूएपीए के तहत बंद थे, ने चुनाव से पहले 2 अक्टूबर 2020 को जेल से ही अपनी पार्टी राइजोर दल शुरू की।1

चुनाव आयोग ने 26 फ़रवरी 2021 को राज्य के लिए तीन चरणों का कार्यक्रम घोषित किया। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बताया कि मतदान 27 मार्च, 1 अप्रैल और 6 अप्रैल को होगा और मतगणना 2 मई को।2

राहुल गांधी ने 20 मार्च को असम के लिए कांग्रेस का घोषणापत्र जारी किया, जिसमें हर गृहिणी को हर महीने 2,000 रुपये, 200 यूनिट मुफ़्त बिजली और नागरिकता संशोधन क़ानून को रद्द करने का वादा था।3

तीन दिन बाद, 23 मार्च को, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी का घोषणापत्र जारी किया, जिसमें सुधारा हुआ राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर और ओरुनोदोई योजना के तहत 30 लाख परिवारों को हर महीने 3,000 रुपये देने का वादा था।4

गोगोई ख़ुद न्यायिक हिरासत में रहते हुए शिवसागर से राइजोर दल के उम्मीदवार बने और उन्होंने अपना कोई प्रचार नहीं किया।5

स्रोत
  1. 1 wikipedia.org
  2. 2 wikipedia.org
  3. 3 freepressjournal.in
  4. 4 freepressjournal.in
  5. 5 wikipedia.org

क्या बदला

भाजपा की अपनी सीटों की संख्या में बहुत मामूली बदलाव हुआ, जबकि एक नई पार्टी ने पहली बार जगह बनाई और उसके एक सहयोगी दल का समर्थन ढह गया।

उसने फिर 60 सीटें जीतीं, जो पिछले चुनाव की उसकी 60 सीटों के बराबर थीं।

नई पार्टी यूपीपीएल थी, जो पहली बार विधान सभा में पहुँची।

सबसे बड़ा बदलाव भाजपा से कांग्रेस की ओर रहा: जिन 43 सीटों पर पार्टी बदली, उनमें से 9 इसी तरह बदलीं।

पिछले चुनाव के मुक़ाबले 2.6 प्रतिशत अंक गिरा।

अहम आँकड़े

सबसे क़रीबी मुक़ाबला नाजिरा, असम में हुआ, जहाँ 683 वोट रहा।

इस चुनाव का सबसे बड़ा जीत का अंतर जनिया, असम में रहा, जहाँ पहले और दूसरे स्थान के बीच 78.4% वोटों का फ़ासला था।

जलेश्वर, असम में किसी भी सीट से ज़्यादा मतदान प्रतिशत दर्ज हुआ, 93.4%।

सबसे ज़्यादा उम्मीदवार अलगापुर, असम में उतरे, बैलट पर 19 नाम थे।

पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से दिसपुर, असम राज्य का सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, जिसकी मतदाता सूची में 4,12,160 नाम थे।

पूरे राज्य में को 2,19,578 वोट मिले, यानी कुल वोटों का 1.1%।

पृष्ठभूमि

21 जनवरी 1972 से लागू पूर्वोत्तर क्षेत्र पुनर्गठन अधिनियम ने पुराने असम राज्य से मणिपुर, त्रिपुरा और मेघालय राज्य बनाए और असम अपनी मौजूदा सीमाओं तक सिमट गया।6

15 अगस्त 1985 को हुए असम समझौते ने आप्रवासन पर छह साल से चल रहे आंदोलन को ख़त्म किया और विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए 1 जनवरी 1966 की अंतिम तारीख़ तय की। इसके बाद आंदोलन के नेताओं ने असम गण परिषद बनाई, जिसने उसी दिसंबर का विधान सभा चुनाव जीता और उसके अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार महंत मुख्यमंत्री बने।7

स्रोत
  1. 6 wikipedia.org
  2. 7 wikipedia.org (1) wikipedia.org (2)

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RBI 2024-25

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