दूसरी जीत, और त्रिशंकु सदन
क्या हुआ
इंडियन नेशनल कांग्रेस एक और कार्यकाल के लिए सत्ता में बनी रही, हालाँकि इस बार अपने दम पर बहुमत के बिना।
कांग्रेस ने 126 सीटों में से 53 सीटें जीतीं।
यह 64 सीटों के बहुमत के आँकड़े से कम था, और सदन (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) रहा।
असम गण परिषद ने 24 सीटें जीतीं।
क्या बदला
कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए भी काफ़ी ज़मीन गँवाई, और एक नई पार्टी पहली बार विधान सभा में पहुँची।
कांग्रेस 71 सीटों से घटकर 53 सीटों पर आ गई।
यह नई पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट थी।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) भी बदला, पिछले चुनाव से 2.0 प्रतिशत अंक ऊपर।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ी टक्कर जनिया, असम में हुई, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 90 वोट रहा।
सबसे बड़ा जीत का अंतर टीटाबर, असम में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 48.6% वोट आगे रहा।
राज्य भर में मतदान प्रतिशत 75.7% तक पहुँचा, जो उस समय तक असम में सबसे ज़्यादा था।
सबसे भरा हुआ बैलट अलगापुर, असम में था, जहाँ एक सीट के लिए 25 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
इस चुनाव में सिर्फ़ दो मुख्य दावेदारों ने ही नहीं, बल्कि कई छोटे दलों और निर्दलीयों ने भी सीटें जीतीं।
11 अलग-अलग दलों ने कम से कम एक सीट जीती, निर्दलीयों को मिलाकर — अकेले निर्दलीयों ने 22 सीटें जीतीं।