कांग्रेस सत्ता में बनी रही, पर कम सीटों के साथ
क्या हुआ
कांग्रेस दूसरे कार्यकाल के लिए सत्ता में बनी रही, पहले से कम सीटों के साथ।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 108 सीटों में से 71 सीटें जीतीं।
फिर भी यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 16 सीटें ज़्यादा था।
फिर भी उसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 8.9 प्रतिशत अंक बढ़ा।
क्या बदला
इस चुनाव में एक नई राजनीतिक पार्टी भी असम की विधान सभा में पहुँची और वहाँ पहली बार सीटें जीतीं।
प्रजा सोशलिस्ट पार्टी पहली बार सदन में पहुँची।
पूरे मुक़ाबले में 94 निर्वाचन क्षेत्रों में 307 उम्मीदवार उतरे।
यानी औसतन हर सीट पर लगभग 3.3 उम्मीदवार।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
इस चुनाव का सबसे कड़ा मुक़ाबला आइजल पूर्व, असम में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 157 वोट रहा।
दूसरी ओर, सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला डूमडूमा, असम में हुआ, जहाँ जीत का अंतर 78.4% रहा।
इस चुनाव में सबसे अच्छा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) रामपुर, असम में रहा, 66.9%।
सबसे ज़्यादा पंजीकृत मतदाता पाथरकांदी, असम में थे: 97,039।
पृष्ठभूमि
इस बार पूरे असम में पिछले चुनाव से कम मतदाताओं ने वोट डाला।
मतदान प्रतिशत में -2.7 प्रतिशत अंक का बदलाव आया, और यह 47.8% रहा।