अगप की वापसी, लेकिन बहुमत के बिना
क्या हुआ
एक क्षेत्रीय पार्टी सत्ता में लौटी, लेकिन इस बार अपने दम पर बहुमत के बिना।
असम गण परिषद ने 61 सीटें जीतीं, जो 64 सीटों के बहुमत के आँकड़े से कम थीं — (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) सदन।
इसके बजाय उसने (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) नाम के गठबंधन के ज़रिए सरकार चलाई, जिसके पास कुल 66 सीटें थीं।
क्या बदला
सीटें फिर उस क्षेत्रीय पार्टी की ओर लौटीं जो कुछ साल पहले पहली बार सत्ता में आई थी।
किसी भी पार्टी से ज़्यादा नुक़सान इंडियन नेशनल कांग्रेस को हुआ।
उसकी 31 सीटें अगप के पास चली गईं।
इस चुनाव में ऑटोनोमस स्टेट डिमान्ड कमेटी, ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (तिवारी) और यूनाइटेड माइनॉरिटीज फ्रंट, असम ने भी पहली बार अपने नाम से सीटें जीतीं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
कांग्रेस को असल में विजेता से ज़्यादा वोट मिले: 30.7%, जबकि विजेता को 30.1% — फिर भी उसकी सीटें कहीं कम रहीं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: मोरान, असम का फ़ैसला सिर्फ़ 262 वोटों से हुआ।
डूमडूमा, असम में (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) बढ़कर कुल वोटों का 49.7% हो गया, जो इस चुनाव में सबसे बड़ा था।
पृष्ठभूमि
इससे राज्य पर नियंत्रण के लिए क्षेत्रीय पार्टी और उसकी राष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वी के बीच पुरानी होड़ जारी रही।