आमगुरीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2021
प्रदीप हज़ारिका (AGP) ने 2021 के विधान सभा चुनाव में 48.0% वोट पाकर आमगुरी सीट जीती और अंगकिता दत्त (INC) को 6,179 वोटों से हराया।
1978 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 103 मरियानी थी। 2021 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2026 से सीट नंबर 103 गोलाघाट है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
6.0% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
5 उम्मीदवार + नोटानाम पर टैप करें
| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | प्रदीप हज़ारिका NDA | NDA | 49,89148.0% |
| 2 | अंगकिता दत्त | 43,71242.1% | |
| 3 | चन्द्र बरुआ AJP | AJP | 6,9876.7% |
| — | नोटा नोटा | नोटा | 1,3131.3% |
| 4 | प्रदीप हज़ारिका निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0221.0% |
| 5 | राजकुमार दुवरा निर्दलीय | निर्दलीय | 9590.9% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
साफ़ जीत, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
AGP, INC और AJP को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.42 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
नोटा को कितने वोट मिले?
वोट नोटा (“इनमें से कोई नहीं”) को मिले
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
उम्मीदवारों ने क्या घोषित किया
उम्मीदवारों ने अपने चुनावी हलफ़नामों में आपराधिक मामले घोषित किए दर्ज मामलों का मतलब सज़ा नहीं है — किसी लंबित मामले से कोई दोषी साबित नहीं होता।
घोषित संपत्ति का मध्य मान ₹0.95 करोड़ आधे उम्मीदवारों की संपत्ति इससे कम है।
यह सीट नंबर 2026 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2026 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
आमगुरी से कौन जीता, 1978–2021
AGP ने 2016 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 43.8% से बढ़कर 48.0% हो गया। यह 2001 के बाद यहाँ का सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 2016 के 85.6% से घटकर 83.0% रह गया।
- 1978खगेन बोरबरुआ (RCI), जीत का अंतर 2.6%
- 1983कीर्ति दत्त (INC), जीत का अंतर 87.5%
- 1985प्रदीप हज़ारिका (IND), जीत का अंतर 50.0%
- 1991अंजन दत्त (INC), जीत का अंतर 0.5%
- 1996प्रदीप हज़ारिका (AGP), जीत का अंतर 10.9%
- 2001अंजन दत्त (INC), जीत का अंतर 14.2%
- 2006प्रदीप हज़ारिका (AGP), जीत का अंतर 5.4%
- 2011अंजन दत्त (INC), जीत का अंतर 0.3%
- 2016प्रदीप हज़ारिका (AGP), जीत का अंतर 1.7%
- 2021प्रदीप हज़ारिका (AGP), जीत का अंतर 6.0%