आमगुरीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2011
अंजन दत्त (INC) ने 2011 के विधान सभा चुनाव में 47.5% वोट पाकर आमगुरी सीट जीती और प्रदीप हज़ारिका (AGP) को 286 वोटों से हराया।
1978 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 103 मरियानी थी। 2021 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2026 से सीट नंबर 103 गोलाघाट है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
आमगुरी का फ़ैसला सिर्फ़ 0.3% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 286 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवारनाम पर टैप करें
| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | अंजन दत्त UPA | UPA | 39,54947.5% |
| 2 | प्रदीप हज़ारिका | 39,26347.2% | |
| 3 | अनूप गोगोई NDA | NDA | 1,8232.2% |
| 4 | राज कुमार दुवारा | 1,4051.7% | |
| 5 | माणिक दत्त UPA | UPA | 5980.7% |
| 6 | जयंत गोगोई | 5530.7% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
नज़दीकी मुक़ाबला, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC और AGP को 95% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.22 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
उम्मीदवारों ने क्या घोषित किया
उम्मीदवारों ने अपने चुनावी हलफ़नामों में आपराधिक मामले घोषित किए दर्ज मामलों का मतलब सज़ा नहीं है — किसी लंबित मामले से कोई दोषी साबित नहीं होता।
घोषित संपत्ति का मध्य मान ₹0.15 करोड़ आधे उम्मीदवारों की संपत्ति इससे कम है।
यह सीट नंबर 2026 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2026 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
आमगुरी से कौन जीता, 1978–2021
INC ने यह सीट AGP से छीन ली, जिसने इसे 2006 में जीता था; INC ने यहाँ पिछली बार 2001 में जीत दर्ज की थी। 1978 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 2006 के 82.2% से घटकर 75.8% रह गया। इसके बाद 2016 के चुनाव में यह सीट AGP ने जीती।
- 1978खगेन बोरबरुआ (RCI), जीत का अंतर 2.6%
- 1983कीर्ति दत्त (INC), जीत का अंतर 87.5%
- 1985प्रदीप हज़ारिका (IND), जीत का अंतर 50.0%
- 1991अंजन दत्त (INC), जीत का अंतर 0.5%
- 1996प्रदीप हज़ारिका (AGP), जीत का अंतर 10.9%
- 2001अंजन दत्त (INC), जीत का अंतर 14.2%
- 2006प्रदीप हज़ारिका (AGP), जीत का अंतर 5.4%
- 2011अंजन दत्त (INC), जीत का अंतर 0.3%
- 2016प्रदीप हज़ारिका (AGP), जीत का अंतर 1.7%
- 2021प्रदीप हज़ारिका (AGP), जीत का अंतर 6.0%