राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस को सबसे ज़्यादा सीटें
क्या हुआ
इंडियन नेशनल कांग्रेस लोक सभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन अपने दम पर बहुमत से पीछे रही।
उसने कुल 536 सीटों में से 244 सीटें जीतीं।
इससे वह 269 सीटों के बहुमत के आँकड़े से पीछे रह गई।
भारतीय जनता पार्टी 20.1% वोट पाकर 121 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही।
कांग्रेस का अपना (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 36.4% रहा, जो कुल के आधे से काफ़ी कम था, फिर भी सदन में सबसे ज़्यादा सीटों के लिए काफ़ी था।
चुनाव प्रचार
भारतीय जनता पार्टी अप्रैल 1980 में जनता पार्टी (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) के पूर्व सदस्यों ने बनाई थी, और अटल बिहारी वाजपेयी इसके पहले अध्यक्ष थे। पार्टी ने अपना पहला आम चुनाव 1984 में लड़ा।1
चुनाव के बीच कांग्रेस नेता के रूप में प्रचार कर रहे राजीव गांधी की 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरुंबुदूर में एक रैली में आत्मघाती हमलावर ने हत्या कर दी। चुनाव के बाक़ी चरण, जो पहले से जारी थे, कुछ समय के लिए टाल दिए गए और फिर मतदान आगे बढ़ा।2
चुनाव से पहले उग्रवादियों ने कई उम्मीदवारों और प्रचारकों की हत्या कर दी, जिसके बाद पंजाब में मतदान रद्द कर दिया गया। जम्मू और कश्मीर में भी, उग्रवाद से जुड़े अलग कारणों से, मतदान रद्द हुआ। पंजाब का लोक सभा चुनाव आख़िरकार अलग से फ़रवरी 1992 में हुआ, जबकि जम्मू और कश्मीर ने इस लोक सभा के लिए वोट डाला ही नहीं।3
क्या बदला
इस चुनाव में किसी एक पार्टी का सबसे बड़ा फ़ायदा भाजपा को हुआ, जिसने ज़्यादातर सीटें जनता दल से छीनीं।
इनमें से 46 सीटें उसके खाते में गईं।
ख़ुद कांग्रेस की सीटें इस बार 197 से बढ़कर 244 हो गईं।
पिछले चुनाव के मुक़ाबले देश भर में 521 निर्वाचन क्षेत्रों में से 206 में जीतने वाली पार्टी बदल गई।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) पिछले चुनाव से -6.0 प्रतिशत अंक बदलकर लगभग 55.1% रहा।
2 सीटों का मतदान प्रतिशत रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है, इसलिए ऊपर दिए राष्ट्रीय मतदान प्रतिशत में वे शामिल नहीं हैं।
अहम आँकड़े
इस चुनाव का सबसे कड़ा मुक़ाबला अकबरपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ: विजेता की (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) 156 वोट था।
इस चुनाव में सबसे बड़ा जीत का अंतर सिक्किम, सिक्किम में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 86.9% वोट आगे रहा।
सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत कूच बिहार, पश्चिम बंगाल में रहा, जहाँ 83.5% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो देश की किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा था।
पूरे देश में सबसे ज़्यादा मतदाता ठाणे, महाराष्ट्र में थे, मतदाता सूची में 17,44,592 पंजीकृत मतदाता थे।
पूर्व दिल्ली, दिल्ली में किसी भी सीट से ज़्यादा उम्मीदवार उतरे, बैलट पर 105 नाम थे।
देश भर में 8,807 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा, यानी औसतन हर सीट पर लगभग 16.5 उम्मीदवार।
पृष्ठभूमि
संसद ने दिसंबर 1988 में 61वाँ संविधान संशोधन पारित किया, जिससे लोक सभा चुनावों में वोट डालने की न्यूनतम उम्र 21 से घटकर 18 साल हो गई। यह मार्च 1989 से लागू हुआ, उस साल के आम चुनाव से पहले, और लाखों नए युवा मतदाता जुड़े।4