मोदी की भाजपा को बड़े बहुमत के साथ दूसरा कार्यकाल
क्या हुआ
भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अभियान की अगुवाई की।1
उसने 543 सीटों में से 303 सीटें जीतीं, यानी अपने दम पर बहुमत।
यह बहुमत के लिए ज़रूरी 272 सीटों के आँकड़े से 31 सीटें ज़्यादा था।
इंडियन नेशनल कांग्रेस 19.5% वोट पाकर 52 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही।
पार्टी के (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 37.3% तक पहुँचा, जो भारत की 'सबसे ज़्यादा वोट पाने वाला जीतेगा' (फ़र्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट) व्यवस्था में फिर भी 55.8% सीटों में बदल गया।
चुनाव प्रचार
जनवरी 2019 में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 80 में से 76 लोक सभा सीटों पर मिलकर चुनाव लड़ने के लिए (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) की घोषणा की।2
16 मार्च 2019 को नरेंद्र मोदी ने 'मैं भी चौकीदार' अभियान शुरू किया और अपने ट्विटर नाम में 'चौकीदार' जोड़ा — यह रफ़ाल लड़ाकू विमान की ख़रीद को लेकर राहुल गांधी के 'चौकीदार चोर है' तंज़ का जवाब था।3
25 मार्च 2019 को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने न्यूनतम आय योजना की घोषणा की, जिसमें सबसे ग़रीब 20% परिवारों को सालाना ₹72,000 तक देने का वादा था।4
फिर दोनों मुख्य दलों ने अलग-अलग एजेंडा रखा: भाजपा के घोषणापत्र में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर और 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा था, जबकि कांग्रेस के घोषणापत्र में देश भर में किसानों की कर्ज़माफ़ी और हर नागरिक के लिए मुफ़्त जाँच, दवाइयाँ और अस्पताल में इलाज का वादा था।5
फिर चुनाव आयोग ने 11 अप्रैल से 19 मई तक सात चरणों में मतदान कराया, और मतगणना 23 मई को हुई। द्रमुक नेताओं से जुड़ी नक़दी ज़ब्ती के चलते आयोग ने वेल्लोर में मतदान रद्द कर दिया, और क़ानून-व्यवस्था की चिंताओं के कारण त्रिपुरा पूर्व का मतदान टाल दिया।1
क्या बदला
इस चुनाव में किसी एक पार्टी का सबसे बड़ा फ़ायदा द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम को हुआ, जिसने ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम से सीटें छीनीं।
इनमें से 23 सीटें उसके खाते में गईं।
भाजपा की अपनी सीटें पिछले चुनाव से 21 बढ़ीं, जिससे उसका पहले से मौजूद बहुमत और बड़ा हुआ।
पिछले चुनाव के बाद देश भर में 543 निर्वाचन क्षेत्रों में से 186 दूसरी पार्टी के हाथ गए — सदन के एक-तिहाई से ज़्यादा।
अलग से देखें तो भाजपा के मतों के हिस्से में पिछले चुनाव से +6.3 प्रतिशत अंक का बदलाव आया, जबकि कांग्रेस के लिए यह +0.2 प्रतिशत अंक रहा।
देश भर में (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) 0.9 प्रतिशत अंक बढ़कर लगभग 67.3% हो गया।
अहम आँकड़े
इस चुनाव का सबसे कड़ा मुक़ाबला मछलीशहर, उत्तर प्रदेश में हुआ: विजेता की (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) 181 वोट था।
इस चुनाव में सबसे बड़ा जीत का अंतर नवसारी, गुजरात में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 52.7% वोट आगे रहा।
सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत धुबरी, असम में रहा, जहाँ 90.7% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो देश की किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा था।
पूरे देश में सबसे ज़्यादा मतदाता मल्काजगिरि, तेलंगाना में थे, मतदाता सूची में 31,50,313 पंजीकृत मतदाता थे।
देश भर में 65,13,355 मतदाताओं ने (इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) चुना, यानी कुल डाले गए वोटों का 1.1%।
किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा उम्मीदवार निज़ामाबाद, तेलंगाना में थे — 185, और मतपत्र पर नोटा अलग से। इनमें से 178 हल्दी किसान थे जो न्यूनतम समर्थन मूल्य की माँग कर रहे थे, और चुनाव आयोग को सबको जगह देने के लिए हर मतदान केंद्र पर 12 बैलट यूनिट लगानी पड़ीं।6
पृष्ठभूमि
संसद ने फ़रवरी 2014 में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम पारित किया, जिससे 2 जून 2014 को राज्य बँटा और तेलंगाना भारत का 29वाँ राज्य बना। 2019 का चुनाव पहला आम चुनाव था जिसमें दोनों उत्तराधिकारी राज्यों ने अलग-अलग मतदान किया।7
सुप्रीम कोर्ट ने मतदान से पहले वोटिंग मशीन की काग़ज़ी पर्चियों की ज़्यादा जाँच का आदेश भी दिया। 8 अप्रैल 2019 के उसके फ़ैसले से हर विधान सभा क्षेत्र में जाँचे जाने वाले मतदान केंद्रों की संख्या एक से बढ़कर पाँच हो गई।8