त्रिशंकु लोक सभा: कांग्रेस बहुमत से पीछे
क्या हुआ
नौवें आम चुनाव में सबसे ज़्यादा सीटें इंडियन नेशनल कांग्रेस ने जीतीं, लेकिन सदन (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) रहा।
उसने 197 सीटें जीतीं, जबकि चुनाव से पहले उसके पास 414 सीटें थीं।
इससे वह 265 सीटों के बहुमत के आँकड़े से पीछे रह गई; जनता दल 143 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही।
उसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 39.5% था, जो जनता दल के 17.8% से काफ़ी आगे था, लेकिन यह बढ़त सदन पर नियंत्रण में नहीं बदल सकी।
चुनाव प्रचार
जनता पार्टी (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) के टूटने के बाद 6 अप्रैल 1980 को उसके भारतीय जनसंघ धड़े के सदस्यों ने भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की, और अटल बिहारी वाजपेयी इसके पहले अध्यक्ष बने।1
अप्रैल 1987 में स्वीडिश रेडियो ने ख़बर दी कि हथियार बनाने वाली कंपनी बोफ़ोर्स ने भारत से हॉवित्ज़र तोपों का एक बड़ा सौदा पाने के लिए रिश्वत दी थी। इसमें राजीव गांधी की सरकार के क़रीबी लोगों के नाम आए, और यह मामला उनके कार्यकाल के आख़िरी दौर में उनका पीछा करता रहा।2
11 अक्टूबर 1988 को वी. पी. सिंह ने कई विपक्षी गुटों — अपने जन मोर्चा, जनता पार्टी और लोक दल — का विलय करके एक पार्टी, जनता दल, बनाई। फिर यह पार्टी कांग्रेस के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने के लिए क्षेत्रीय दलों के साथ राष्ट्रीय मोर्चा नाम के गठबंधन में शामिल हुई।3
दिसंबर 1988 में संसद ने 61वाँ संविधान संशोधन पारित किया, जिससे लोक सभा और राज्य विधान सभा चुनावों में वोट डालने की न्यूनतम उम्र 21 से घटकर 18 साल हो गई। यह मार्च 1989 से लागू हुआ, और उस नवंबर के चुनाव में लाखों नए युवा मतदाता जुड़े।4
क्या बदला
इस चुनाव में सबसे बड़ा फ़ायदा जनता दल को हुआ, जिसने ज़्यादातर सीटें कांग्रेस से छीनीं।
इनमें से 134 सीटें उसके खाते में गईं।
देश भर में 529 निर्वाचन क्षेत्रों में से 322 दूसरी पार्टी के हाथ गए — सदन के आधे से काफ़ी ज़्यादा।
कांग्रेस के मतों के हिस्से में पिछले चुनाव से -8.6 प्रतिशत अंक का बदलाव आया।
देश भर में (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) -1.9 प्रतिशत अंक बदलकर लगभग 61.1% रहा।
अहम आँकड़े
इस चुनाव का सबसे कड़ा मुक़ाबला अनाकापल्ले, आंध्र प्रदेश में हुआ: विजेता की (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) 9 वोट था।
इस चुनाव में सबसे बड़ा जीत का अंतर अनंतनाग, जम्मू और कश्मीर में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 97.2% वोट आगे रहा।
सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत लद्दाख, जम्मू और कश्मीर में रहा, जहाँ 86.4% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो देश की किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा था।
पूरे देश में सबसे ज़्यादा मतदाता बाहरी दिल्ली, दिल्ली में थे, मतदाता सूची में 15,74,973 पंजीकृत मतदाता थे।
किसी भी सीट से ज़्यादा उम्मीदवार भिवानी, हरियाणा में उतरे, बैलट पर 121 नाम थे।
पृष्ठभूमि
अप्रैल 1987 में स्वीडिश रेडियो ने ख़बर दी कि बोफ़ोर्स ने भारत से हॉवित्ज़र तोपों का एक बड़ा सौदा पाने के लिए रिश्वत दी थी। इसमें राजीव गांधी की सरकार के क़रीबी लोगों के नाम आए, और यह मामला उनके पूरे आख़िरी कार्यकाल तक चला।2
11 अक्टूबर 1988 को वी. पी. सिंह ने कई विपक्षी गुटों को मिलाकर एक नई पार्टी, जनता दल, बनाई। फिर यह पार्टी कांग्रेस के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने के लिए क्षेत्रीय सहयोगी दलों के साथ राष्ट्रीय मोर्चा नाम के गठबंधन में शामिल हुई।3
संसद के 61वें संविधान संशोधन ने वोट डालने की उम्र 21 से घटाकर 18 साल कर दी, जो मार्च 1989 से लागू हुआ। इसके बाद लाखों नए युवा मतदाता, जो अब वोट डालने के योग्य थे, मतदाता सूची में जुड़े।4