भाजपा को पहला बहुमत
क्या हुआ
इस बार गुजरात में एक पार्टी ने पहली बार अपने दम पर बहुमत हासिल किया।
उसने 182 में से 121 सीटें जीतीं — हर लिहाज़ से भारी जीत।
उसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 42.5% रहा।
इंडियन नेशनल कांग्रेस 45 सीटों के साथ काफ़ी पीछे रही।
क्या बदला
पिछली सरकार की अगुवाई करने वाली पार्टी इस बार तेज़ी से गिरी।
35 सीटें सीधे जनता दल से भारतीय जनता पार्टी के पास गईं — उस साल किन्हीं भी दो दलों के बीच सबसे बड़ा बदलाव।
ख़ुद जनता दल ढह गई।
भाजपा की अपनी सीटें एक ही चुनाव में 67 से बढ़कर 121 हो गईं।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला राधनपुर, गुजरात में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 307 वोट रहा।
राज्य भर में (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) 62.2% तक पहुँचा, जो तब तक राज्य के अपने इतिहास में सबसे ऊँचा था।
इनमें किसी एक सीट पर सबसे ऊँचा मतदान प्रतिशत दिओदर, गुजरात में रहा, 82.9%।
उस साल सबसे ज़्यादा मतदाता चोर्यासी, गुजरात में थे, मतदाता सूची में 7,01,573 लोग थे।
पृष्ठभूमि
इसके साथ राज्य में जीतने वाली पार्टी के बढ़ते समर्थन के कई सालों का दौर अपने शिखर पर पहुँचा।