गुजरात 1985 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
INC: 149 सीटें (81.9%)JNP: 14 सीटें (7.7%)BJP: 11 सीटें (6.0%)IND: 8 सीटें (4.4%)बहुमत के लिए 92182सरकार बनाने के लिए 92
  • INC14981.9%
  • JNP147.7%
  • BJP116.0%
  • निर्दलीय84.4%
चुनाव की कहानी

कांग्रेस ने सीटों का नया रिकॉर्ड बनाया

क्या हुआ

इंडियन नेशनल कांग्रेस ने गुजरात में जनता पार्टी को हराकर भारी जीत दर्ज की।

उसने 182 सीटों में से 149 सीटें जीतीं।

इससे उसके पास बहुमत से 57 सीटें ज़्यादा थीं।

कांग्रेस ने 55.6% वोट पाकर 81.9% सीटें जीतीं।

जनता पार्टी 19.3% वोट और 14 सीटों के साथ बहुत पीछे रही।

चुनाव प्रचार

जनवरी 1985 में मुख्यमंत्री माधवसिंह सोलंकी की सरकार ने अपनी आरक्षण नीति बदली और दलितों और आदिवासियों के मौजूदा कोटे के ऊपर अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 18% सरकारी पद आरक्षित किए। 5 मार्च के विधान सभा चुनाव से पहले यही बदलाव प्रचार का मुख्य मुद्दा बन गया।1

18 फ़रवरी 1985 को अहमदाबाद में इंजीनियरिंग के छात्रों ने विरोध में अपनी प्रारंभिक परीक्षाओं का बहिष्कार किया, फिर ऑल गुजरात एजुकेशनल रिफ़ॉर्म एक्शन कमेटी बनाकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की और हर परीक्षा का बहिष्कार किया। राज्य सरकार ने जवाब में स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए।2

अगेरेक ने 25 फ़रवरी को राज्य भर में बंद का आह्वान किया, जिसका असर अहमदाबाद में हर जगह एक जैसा नहीं रहा; इसे वकीलों और डॉक्टरों के संगठनों के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी से जुड़े छात्र समूहों का समर्थन मिला।3

मतदान से एक हफ़्ता पहले, 28 फ़रवरी को, अशांति के बीच एक बस में आग लगा दी गई, जिसमें एक यात्री की मौत हो गई। इसके बाद के दिनों में हिंसा थमी और मतदान तय समय पर हुआ।4

स्रोत
  1. 1 wikipedia.org
  2. 2 wikipedia.org
  3. 3 wikipedia.org
  4. 4 wikipedia.org

क्या बदला

यह तब तक गुजरात के इतिहास में किसी भी एक पार्टी की सबसे बड़ी विधान सभा जीत थी।

पूरे चुनाव में 4 दलों ने सीटें जीतीं।

इससे कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिला, जो किसी और पार्टी की ज़रूरत के बिना विधान सभा चलाने के लिए काफ़ी था।

में बहुत मामूली बदलाव हुआ; यह पिछले चुनाव से 0.9 प्रतिशत अंक बढ़ा।

अहम आँकड़े

सबसे क़रीबी मुक़ाबला लुणावाडा, गुजरात में हुआ, जिसका फ़ैसला 103 वोटों से हुआ।

इस चुनाव का सबसे बड़ा कुतियाणा, गुजरात में रहा, जहाँ जीत 92.2% वोटों के अंतर से हुई।

चाणस्मा, गुजरात में किसी भी सीट से ज़्यादा मतदान प्रतिशत दर्ज हुआ, 75.8%।

पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से सरखेज, गुजरात सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, जहाँ मतदाता सूची में 2,45,514 नाम थे।

हिंमतनगर, गुजरात में किसी भी सीट से ज़्यादा उम्मीदवार उतरे, बैलट पर 16 नाम थे।

पृष्ठभूमि

कांग्रेस नेता माधवसिंह सोलंकी ने 1980 से क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम मतदाताओं का एक गठजोड़ बनाया था, जिसे खाम रणनीति के नाम से जाना गया।5

इसी गठजोड़ की मदद से इस चुनाव में कांग्रेस को 81.9% सीटें मिलीं।

स्रोत
  1. 5 wikipedia.org

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