कांग्रेस की जीत, पर कम अंतर से
क्या हुआ
इंडियन नेशनल कांग्रेस फिर जीती, हालाँकि उसका बहुमत घट गया।
कांग्रेस ने कुल 168 सीटों में से 93 सीटें जीतीं।
फिर भी यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 8 सीटें ज़्यादा था।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी स्वतंत्र पार्टी 66 सीटों पर पहुँची, और उसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) में 13.7 प्रतिशत अंक की बढ़त हुई।
क्या बदला
इस बार विधान सभा फिर बड़ी हुई और नक्शे पर नई सीटें जुड़ीं।
सीटें 154 से बढ़कर 168 हो गईं।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) भी राज्य के इतिहास में तब तक के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँचा।
इस बार राज्य के 59.7% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: जसदण, गुजरात में (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 67 वोट रहा।
दूसरी ओर, पारडी, गुजरात में मतगणना का सबसे बड़ा जीत का अंतर रहा, जहाँ विजेता 74.9% वोटों से आगे रहा।
सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत दसक्रोई, गुजरात में रहा, जहाँ 78.4% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला आलिया, गुजरात में था, जहाँ 7 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
इस परिणाम की पहचान कोई एक घटना नहीं है; इसमें बस राज्य की सत्ता पर उसी पार्टी की पकड़ जारी रही।