नए नेता की पहली बड़ी जीत
क्या हुआ
भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा बहुमत हासिल किया, जबकि विधान सभा में उसके मुख्य प्रतिद्वंद्वी की मौजूदगी सिमट गई।
भाजपा ने कुल 182 सीटों में से 127 सीटें जीतीं, यह एकतरफ़ा जीत थी।
यह प्रचंड बहुमत के लिए काफ़ी था — सरकार चलाने के लिए ज़रूरी सीटों से 35 सीटें ज़्यादा।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी इंडियन नेशनल कांग्रेस के पास सिर्फ़ 51 सीटें बचीं।
क्या बदला
इस बार भाजपा ने अपनी बढ़त और बढ़ाई, और हाथ बदलने वाली ज़्यादातर सीटें उसी की ओर गईं।
उसकी सीटें 117 से बढ़कर 127 हो गईं।
जिन 78 निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी बदली, उनमें से 35 ने पहले कांग्रेस को चुना था और इस बार भाजपा को चुना।
भाजपा अब राज्य में लगातार 3 चुनाव जीत चुकी है।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: उमरगाम, गुजरात का फ़ैसला सिर्फ़ 73 वोटों से हुआ, जो उस साल पूरे राज्य में सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, एलिसब्रिज, गुजरात में जीत का अंतर 56.2% वोट रहा।
उस साल किसी भी सीट से ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) कडी, गुजरात में दर्ज हुआ, 79.4%।
राज्य में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार असारवा, गुजरात में उतरे, कुल 15।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव एक साल पहले राज्य के शीर्ष नेतृत्व में हुए बदलाव के बाद हुआ।