कांग्रेस आगे, पर बहुमत नहीं
क्या हुआ
इस बार कोई भी एक पार्टी अपने दम पर सरकार बनाने लायक़ सीटें नहीं जीत सकी।
इससे गुजरात में (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा बनी।
अब भी (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) के नाम से लड़ रही इंडियन नेशनल कांग्रेस ने सबसे ज़्यादा सीटें जीतीं, कुल 75।
यह 91 सीटों के बहुमत के आँकड़े से कम था।
क्या बदला
कांग्रेस ने अब भी सबसे ज़्यादा सीटें जीतीं, लेकिन पिछले चुनाव के मुक़ाबले उसकी सीटें तेज़ी से घटीं।
वह 140 सीटों से घटकर इस बार सिर्फ़ 75 सीटों पर आ गई।
इस चुनाव और पिछले चुनाव के बीच सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गई थीं, इसलिए हर सीट पर हुए बदलाव गिने नहीं जा सकते।
इसके साथ कांग्रेस लगातार 4 चुनावों में सबसे ज़्यादा सीटें जीत चुकी थी।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
राज्य में सबसे कड़ा मुक़ाबला खेरालु, गुजरात में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 11 वोट था।
दूसरी ओर, मतगणना की सबसे बड़ी जीत बलसार, गुजरात में हुई, जहाँ विजेता 61.4% वोटों से आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) माणावदर, गुजरात में रहा, जहाँ यह 76.4% तक पहुँचा।
उस साल सबसे ज़्यादा मतदाता असारवा, गुजरात में थे, मतदाता सूची में 1,02,966 लोग थे।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव राज्य में गंभीर राजनीतिक उथल-पुथल के दौर के बाद हुआ।