पहले से कम बहुमत
क्या हुआ
भारतीय जनता पार्टी फिर जीती, लेकिन पहले के मुक़ाबले बढ़त काफ़ी कम रह गई।
भाजपा ने कुल 182 सीटों में से 99 सीटें जीतीं, जो सरकार चलाते रहने के लिए काफ़ी थीं।
यह बहुमत के लिए ज़रूरी आँकड़े से सिर्फ़ 7 सीटें ज़्यादा था।
उसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 77 सीटें जीतकर फ़ासला घटा दिया।
क्या बदला
पार्टी सत्ता में बनी रही, लेकिन इस बार उसकी कुछ सीटें प्रतिद्वंद्वी के पास चली गईं।
भाजपा अब राज्य में लगातार 6 चुनाव जीत चुकी है।
राज्य भर में पार्टी बदलने वाली 58 सीटों में से 33 सीटें, जो पहले भाजपा के साथ थीं, इस बार कांग्रेस के पास गईं।
भारतीय ट्रायबल पार्टी ने भी राज्य में पहली बार सीटें जीतीं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: कपराडा, गुजरात का फ़ैसला सिर्फ़ 170 वोटों से हुआ, जो उस साल पूरे राज्य में सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, मजुरा, गुजरात में जीत का अंतर 56.4% वोट रहा।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) सबसे ज़्यादा थराद, गुजरात में 86.1% और सबसे कम गरबाडा, गुजरात में 54.2% रहा।
राज्य भर में 5,51,615 वोट (इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) को गए — कुल वोटों का 1.8%।
पृष्ठभूमि
इस चुनाव में राज्य भाजपा के पास ही रहा, हालाँकि उसकी जीत का अंतर घट गया।