नई सीमाएँ, रिकॉर्ड मतदान
क्या हुआ
भारतीय जनता पार्टी ने फिर जीत हासिल की और सीटों का ठोस बहुमत पाया, जबकि मुख्य विपक्ष काफ़ी पीछे रह गया।
भाजपा ने कुल 182 सीटों में से 115 सीटें जीतीं, यह एकतरफ़ा जीत थी।
इससे वह बहुमत के आँकड़े से 23 सीटें आगे रही।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी इंडियन नेशनल कांग्रेस 61 सीटों के साथ पीछे रही।
क्या बदला
यह गुजरात के नए सिरे से तय किए गए सीटों के नक्शे पर हुआ पहला चुनाव भी था।
सीमाएँ अभी-अभी (सीटों की सीमाओं को सरकारी तौर पर नए सिरे से खींचना, जो भारत की जनसंख्या में बदलाव के साथ समय-समय पर होता है) से गुज़री थीं — यानी समय के साथ भारत की आबादी बदलने पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएँ आधिकारिक रूप से नए सिरे से तय करना।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) 72.0% तक पहुँचा, जो राज्य में अब तक का सबसे ऊँचा है।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: सोजित्रा, गुजरात का फ़ैसला सिर्फ़ 162 वोटों से हुआ, जो उस साल पूरे राज्य में सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, मणिनगर, गुजरात में जीत का अंतर 54.1% वोट रहा।
सभी सीटों में सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत डेडीयापाडा, गुजरात में रहा: 89.2%।
राज्य में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार लींबायत, गुजरात में उतरे, कुल 20।
पृष्ठभूमि
उस साल एक नया दावेदार भी विधान सभा में पहुँचा।
गुजरात परिवर्तन पार्टी ने राज्य में पहली बार सीटें जीतीं।