कांग्रेस की लगातार तीसरी जीत
क्या हुआ
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने गुजरात पर आसानी से अपनी पकड़ बनाए रखी और जीत का वह सिलसिला आगे बढ़ाया, जो राज्य के शुरुआती चुनावों से चला आ रहा था।
उसने कुल 168 सीटों में से 140 सीटें जीतीं।
उसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 50.9% रहा।
सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी इंडियन नेशनल कांग्रेस (संगठन) को सिर्फ़ 16 सीटें मिलीं।
क्या बदला
परिणामों में सबसे साफ़ बदलाव यह था कि सीटें पार्टी के पुराने प्रतिद्वंद्वी से छिटक गईं।
50 सीटें स्वतंत्र पार्टी से कांग्रेस के पास गईं — उस साल किन्हीं भी दो दलों के बीच सबसे बड़ा बदलाव।
स्वतंत्र पार्टी की अपनी सीटें ढह गईं।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला लीमखेडा, गुजरात में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 85 वोट रहा।
दूसरी ओर, मतगणना की सबसे बड़ी जीत देवगढ़ बारिया, गुजरात में हुई, जहाँ विजेता 84.6% वोटों से आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) दसक्रोई, गुजरात में रहा, जहाँ यह 74.5% तक पहुँचा।
उस साल सबसे ज़्यादा मतदाता एलिसब्रिज, गुजरात में थे, मतदाता सूची में 1,15,499 लोग थे।
पृष्ठभूमि
तब तक गुजरात में यह कोई नई कहानी नहीं थी।
इस चुनाव को मिलाकर वह लगातार 3 चुनाव जीत चुकी थी।