एक शांत जीत
क्या हुआ
भारतीय जनता पार्टी फिर आराम से जीती, हालाँकि उसकी कुल सीटें कुछ घट गईं।
भाजपा ने कुल 182 सीटों में से 117 सीटें जीतीं, यह एकतरफ़ा जीत थी।
यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 25 सीटें ज़्यादा था।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी इंडियन नेशनल कांग्रेस 59 सीटों के साथ उसके बाद रही।
क्या बदला
भाजपा की सत्ता बची रही, लेकिन पिछली बार जीती कुछ ज़मीन उसके हाथ से निकल गई।
उसकी अपनी सीटें 127 से घटकर 117 रह गईं।
पूरे राज्य में हाथ बदलने वाली 70 सीटों में से 34 सीटें भाजपा से कांग्रेस के पास गईं।
भाजपा अब राज्य में लगातार 4 चुनाव जीत चुकी है।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: जामजोधपुर, गुजरात का फ़ैसला सिर्फ़ 17 वोटों से हुआ, जो उस साल पूरे राज्य में सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, शहेर कोटडा, गुजरात में जीत का अंतर 85.5% वोट रहा।
उस साल किसी भी सीट से ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) ध्रांगध्रा, गुजरात में दर्ज हुआ, 73.9%।
राज्य में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार पोरबंदर, गुजरात में उतरे, कुल 15।
पृष्ठभूमि
उस साल एक नई पार्टी भी विधान सभा में पहुँची।
राकांपा ने राज्य में पहली बार सीटें जीतीं।