त्रिशंकु और बिखरी हुई विधान सभा
क्या हुआ
इस चुनाव में (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) सदन बना।
सबसे ज़्यादा सीटें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) ने जीतीं, कुल 133 में से 40।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी इंडियन नेशनल कांग्रेस 36 सीटों के साथ ठीक पीछे रही।
दोनों में से कोई भी सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 67 सीटों के आँकड़े के पास नहीं पहुँचा।
क्या बदला
यहाँ सबसे ज़्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी ने इस नाम से पहले कभी कोई सीट नहीं जीती थी।
माकपा ने यहाँ अपने पहले ही चुनाव में 40 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस सिर्फ़ 36 पर सिमट गई।
पिछले चुनाव से (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) 12.1 प्रतिशत अंक घटा।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला चडयमंगलम, केरलम में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 22 वोटों से हुआ।
मतगणना का सबसे बड़ा (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) बडगरा, केरलम में रहा, 42.5% वोट।
इस चुनाव में सबसे कम मतदान प्रतिशत मन्नारक्काड, केरलम में रहा, 47.6%।
किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से ज़्यादा पंजीकृत मतदाता उडुंबनचोला, केरलम में थे, कुल 82,778।
पृष्ठभूमि
इस चुनाव में कई तरह के दल उतरे, लेकिन कोई भी बहुमत के क़रीब नहीं पहुँचा।
7 दलों ने सीटें जीतीं, साथ ही 12 निर्दलीय भी जीते।