बेहद क़रीबी मुक़ाबले वाली विधान सभा
क्या हुआ
कोई भी अकेली पार्टी अपने दम पर बहुमत के क़रीब नहीं पहुँची, और परिणाम ने दोनों मुख्य मोर्चों को लगभग बराबरी पर छोड़ दिया।
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) 140 में से 45 सीटों के साथ सबसे बड़ी अकेली पार्टी बनकर उभरी।
इसके (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) मोर्चे ने कुल 66 सीटें जीतीं, जो 71 सीटों के बहुमत के आँकड़े से कम थीं।
क्या बदला
पिछली सरकार की अगुवाई करने वाली पार्टी यहाँ पिछड़ी, जबकि उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी आगे बढ़ी।
उसकी अपनी सीटें 61 से घटकर 45 रह गईं।
इसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) पिछले चुनाव से 2.3 प्रतिशत अंक घटा, जबकि इंडियन नेशनल कांग्रेस के मतों का हिस्सा 2.3 प्रतिशत अंक बढ़ा।
अहम आँकड़े
इस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला पिरवम, केरलम में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 157 वोटों से हुआ।
इस चुनाव का सबसे बड़ा (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) वेंगरा, केरलम में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 38.4% वोट आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) कुट्टियाडी, केरलम में रहा, 87.7%।
उस साल सबसे ज़्यादा मतदाता आरनमुला, केरलम में थे, कुल 2,07,229 पंजीकृत मतदाता।
पृष्ठभूमि
यह मुक़ाबला भी केरलम के दो मुख्य मोर्चों की पुरानी प्रतिद्वंद्विता के भीतर ही हुआ।