केरलम 2011 का नक्शा लोड हो रहा है…

पार्टी के हिसाब से सीटें
CPM: 45 सीटें (32.1%)INC: 38 सीटें (27.1%)MUL: 20 सीटें (14.3%)CPI: 13 सीटें (9.3%)KEC(M): 9 सीटें (6.4%)JD(S): 4 सीटें (2.9%)IND: 2 सीटें (1.4%)NCP: 2 सीटें (1.4%)अन्य (5 पार्टियाँ): 7 सीटें — RSP 2, SJD 2, KEC(B) 1, KEC(J) 1, KRSP 1बहुमत के लिए 71140सरकार बनाने के लिए 71
चुनाव की कहानी

बेहद क़रीबी मुक़ाबले वाली विधान सभा

क्या हुआ

कोई भी अकेली पार्टी अपने दम पर बहुमत के क़रीब नहीं पहुँची, और परिणाम ने दोनों मुख्य मोर्चों को लगभग बराबरी पर छोड़ दिया।

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) 140 में से 45 सीटों के साथ सबसे बड़ी अकेली पार्टी बनकर उभरी।

इसके मोर्चे ने कुल 66 सीटें जीतीं, जो 71 सीटों के बहुमत के आँकड़े से कम थीं।

क्या बदला

पिछली सरकार की अगुवाई करने वाली पार्टी यहाँ पिछड़ी, जबकि उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी आगे बढ़ी।

उसकी अपनी सीटें 61 से घटकर 45 रह गईं।

इसके पिछले चुनाव से 2.3 प्रतिशत अंक घटा, जबकि इंडियन नेशनल कांग्रेस के मतों का हिस्सा 2.3 प्रतिशत अंक बढ़ा।

अहम आँकड़े

इस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।

सबसे कड़ा मुक़ाबला पिरवम, केरलम में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 157 वोटों से हुआ।

इस चुनाव का सबसे बड़ा वेंगरा, केरलम में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 38.4% वोट आगे रहा।

सबसे ज़्यादा कुट्टियाडी, केरलम में रहा, 87.7%।

उस साल सबसे ज़्यादा मतदाता आरनमुला, केरलम में थे, कुल 2,07,229 पंजीकृत मतदाता।

पृष्ठभूमि

यह मुक़ाबला भी केरलम के दो मुख्य मोर्चों की पुरानी प्रतिद्वंद्विता के भीतर ही हुआ।

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