यूडीएफ की सत्ता में वापसी
क्या हुआ
विपक्षी मोर्चे ने सत्ता वापस हासिल की और पिछले चुनाव से राज्य चला रही सरकार को हटा दिया।
इंडियन नेशनल कांग्रेस के (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) यूडीएफ ने 140 में से 98 सीटें जीतीं।
यह सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 71 सीटों के बहुमत के आँकड़े से आराम से ज़्यादा था।
क्या बदला
इस बार सबसे आगे रही पार्टी का प्रदर्शन पिछले चुनाव में कहीं ख़राब रहा था।
उसकी सीटें तब 37 थीं, इस बार 62 हो गईं।
कुछ छोटे दलों, जद (एस), राकांपा और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी ऑफ केरल (बोल्शेविक), ने केरलम विधान सभा में पहली बार कोई सीट जीती।
अहम आँकड़े
इस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला श्रीकृष्णपुरम, केरलम में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 21 वोटों से हुआ।
लगभग 72.4% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो पिछले चुनाव से 3.4 प्रतिशत अंक ज़्यादा था।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) तोडुपुझा (तोडुपुऴा), केरलम में रहा, जहाँ 83.6% मतदाताओं ने वोट डाला।
उस साल सबसे ज़्यादा मतदाता तृप्पुणित्तुरा, केरलम में थे, कुल 2,14,469 पंजीकृत मतदाता।
पृष्ठभूमि
यह मुक़ाबला उसी दो मोर्चों की प्रतिद्वंद्विता के भीतर हुआ, जो बरसों से यहाँ के चुनावों की दिशा तय करती आ रही थी।