वाम दलों की एकतरफ़ा वापसी
क्या हुआ
विपक्ष में बैठा मोर्चा सत्ता में लौटा और राज्य चला रही सरकार को हटा दिया।
अकेले कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) ने 61 सीटें जीतीं, जो एकतरफ़ा जीत थी, और इसके (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) मोर्चे को कुल 94 सीटें मिलीं।
इसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी इंडियन नेशनल कांग्रेस सिर्फ़ 24 सीटें जीत सकी, जो सरकार की अगुवाई करने वाली पार्टी के लिए भारी गिरावट थी।
क्या बदला
अब राज्य की अगुवाई करने वाली पार्टी के पास इस चुनाव से पहले सीटों का छोटा-सा हिस्सा ही था।
एक ही चुनाव में यह 23 सीटों से 61 सीटों पर पहुँच गई।
फिर भी लगभग 72.3% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो लगभग पहले जितना ही था, पिछली बार से सिर्फ़ 0.1 प्रतिशत अंक कम।
अहम आँकड़े
इस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला नेडुमंगाड, केरलम में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 85 वोटों से हुआ।
इस चुनाव का सबसे बड़ा (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) अलथूर, केरलम में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 42.7% वोट आगे रहा।
इस चुनाव में सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) मंकडा, केरलम में रहा, जहाँ 83.9% मतदाताओं ने वोट डाला।
उस साल सबसे ज़्यादा मतदाता निलंबूर, केरलम में थे, कुल 2,03,352 पंजीकृत मतदाता।
पृष्ठभूमि
अब सरकार की अगुवाई करने वाली पार्टी की जड़ें राज्य की पहली निर्वाचित सरकार तक जाती हैं।