केरलम 1991 का नक्शा लोड हो रहा है…

पार्टी के हिसाब से सीटें
INC: 55 सीटें (39.3%)CPM: 29 सीटें (20.7%)MUL: 19 सीटें (13.6%)CPI: 12 सीटें (8.6%)KEC(M): 10 सीटें (7.1%)IND: 4 सीटें (2.9%)JD: 3 सीटें (2.1%)ICS(SCS): 2 सीटें (1.4%)अन्य (4 पार्टियाँ): 6 सीटें — NDP 2, RSP 2, CPM(K) 1, KEC 1बहुमत के लिए 71140सरकार बनाने के लिए 71
  • INC5539.3%
  • CPM2920.7%
  • MUL1913.6%
  • CPI128.6%
  • KEC(M)107.1%
  • निर्दलीय42.9%
  • JD32.1%
  • ICS(SCS)21.4%
  • अन्य64.3%
चुनाव की कहानी

कांग्रेस की अगुवाई वाले मोर्चे को बहुमत

क्या हुआ

केरलम में सरकार फिर बदली, और जीतने वाले मोर्चे ने अपने दम पर बहुमत हासिल किया।

इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 140 में से 55 सीटें जीतीं, जो अकेले बहुमत से कम थीं।

इसके बजाय इसने मोर्चे के ज़रिए सरकार चलाई, जिसने 60.7% सीटों के साथ बहुमत का आँकड़ा पार किया।

दूसरे स्थान पर रही कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) ने 29 सीटें जीतीं।

क्या बदला

पिछले चुनाव के मुक़ाबले साफ़ तौर पर घटा।

यह घटकर 72.1% रह गया, यानी पिछले चुनाव से 7.8 प्रतिशत अंक कम।

माकपा की 13 सीटें सीधे कांग्रेस के पास गईं, जो इस चुनाव का सबसे बड़ा बदलाव था।

अहम आँकड़े

उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।

सबसे क़रीबी मुक़ाबला कोवलम, केरलम में हुआ, जहाँ सिर्फ़ 21 वोट रहा।

उस साल सबसे बड़ा जीत का अंतर मलप्पुरम, केरलम में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 34.6% वोट आगे रहा।

अरूर, केरलम में लगभग 83.6% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा था।

इस चुनाव में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार एट्टुमानूर, केरलम में उतरे, बैलट पर 16 उम्मीदवार थे।

पृष्ठभूमि

इससे केरलम के दो प्रतिद्वंद्वी मोर्चों के बीच बारी-बारी से सत्ता बदलने का सिलसिला जारी रहा।

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