किसी भी पक्ष को बहुमत नहीं
क्या हुआ
इस चुनाव में (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) सदन बना।
सबसे ज़्यादा सीटें इंडियन नेशनल कांग्रेस ने जीतीं, कुल 133 में से 30।
इसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) 29 सीटों के साथ ठीक पीछे रही।
इसके (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) सहयोगी दलों को मिलाकर भी सिर्फ़ 63 सीटें थीं, जो बहुमत से कम थीं।
क्या बदला
सत्ता पिछले गठबंधन के हाथ से निकल गई, और विधान सभा की तस्वीर काफ़ी बदल गई।
ख़ुद कांग्रेस पिछले चुनाव की सिर्फ़ 9 सीटों से उछलकर इस बार 30 सीटों पर पहुँच गई।
133 निर्वाचन क्षेत्रों में से 79 पिछले चुनाव के मुक़ाबले दूसरी पार्टी के हाथ चले गए।
कुछ नए दलों ने भी यहाँ अपनी पहली सीटें जीतीं: रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी/सोशलिस्ट पार्टी और इंडियन सोशलिस्ट पार्टी।
अहम आँकड़े
इस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला कझक्कूट्टम (कऴक्कूट्टम), केरलम में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 111 वोटों से हुआ।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) मंजेरी, केरलम में दर्ज हुआ, 96.3%।
इस चुनाव में सबसे कम मतदान प्रतिशत त्रिवेंद्रम I, केरलम में रहा, 56.2%।
किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से ज़्यादा पंजीकृत मतदाता उडुंबनचोला, केरलम में थे, कुल 1,10,407।
पृष्ठभूमि
इस परिणाम में सीटें कई दलों और निर्दलीयों के बीच बँटीं।
11 दलों ने सीटें जीतीं, और उनके साथ 16 निर्दलीय सदस्य भी जीते।