कांग्रेस ने सत्ता बचाई
क्या हुआ
राज्य में पहले से सरकार चला रही पार्टी ने बँटे हुए विपक्ष को रोककर सत्ता बचाए रखी।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 140 सीटों में से 38 सीटें जीतीं।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने 23 सीटें जीतीं।
इससे वह 71 सीटों के बहुमत के आँकड़े से पीछे रह गई, यानी सदन (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) रहा।
क्या बदला
यह बढ़ी हुई संख्या वाले विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों पर हुआ पहला चुनाव भी था।
ये अतिरिक्त सीटें (सीटों की सीमाओं को सरकारी तौर पर नए सिरे से खींचना, जो भारत की जनसंख्या में बदलाव के साथ समय-समय पर होता है) से आईं।
विधान सभा की सीटें 133 से बढ़कर 140 हो गईं।
कुछ नए दलों ने राज्य में पहली बार सीटें जीतीं: जनता पार्टी, मुस्लिम लीग (ऑपोजिशन) और केरल कांग्रेस (पिल्लई ग्रुप)।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला एट्टुमानूर, केरलम में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 242 वोट रहा।
उस साल सबसे बड़ा जीत का अंतर तानूर, केरलम में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 55.8% वोट आगे रहा।
बालुश्शेरी, केरलम में लगभग 85.9% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा था।
इस चुनाव में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार नेडुवत्तूर, केरलम में उतरे, बैलट पर 13 उम्मीदवार थे।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव दो बड़े (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) के बीच नहीं, बल्कि कई अलग-अलग दलों और निर्दलीयों के बीच लड़ा गया।
उस साल 10 दलों ने सीटें जीतीं, और इनके अलावा 9 निर्दलीय भी जीते।