वाम दलों को साफ़ बहुमत
क्या हुआ
इस बार एक मोर्चा बहुमत के आँकड़े को आराम से पार कर गया, काफ़ी गुंजाइश के साथ।
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) ने अपने दम पर 140 में से 58 सीटें जीतीं, जो किसी भी दूसरी पार्टी से ज़्यादा थीं।
इसके (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) मोर्चे ने कुल 85 सीटें जीतीं, जो 71 सीटों के बहुमत के आँकड़े से ज़्यादा थीं।
क्या बदला
इस मोर्चे की अगुवाई करने वाली पार्टी ने पिछले चुनाव में बहुत कम सीटें जीती थीं।
उसकी सीटें तब 45 थीं, इस बार 58 हो गईं।
फिर भी इसके अपने (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) पिछले चुनाव से 1.7 प्रतिशत अंक घटा।
इंडियन नेशनल कांग्रेस के मतों का हिस्सा इससे भी ज़्यादा गिरा, 2.7 प्रतिशत अंक।
अहम आँकड़े
इस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला वडक्कनचेरी, केरलम में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 43 वोटों से हुआ।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) चेर्तला, केरलम में रहा, 86.7%।
उस साल सबसे ज़्यादा मतदाता आरनमुला, केरलम में थे, कुल 2,27,943 पंजीकृत मतदाता।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला पूंजार, केरलम में था, जहाँ एक ही सीट के लिए 17 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव उन्हीं राज्य सीमाओं के भीतर हुआ, जो केरलम के बनने के समय से चली आ रही थीं।