वाम मोर्चे की पहली जीत
क्या हुआ
केरलम में सरकार बदल गई; यह राज्य के दो नए प्रतिद्वंद्वी मोर्चों के बीच पहला चुनाव था।
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) ने 140 सीटों में से 35 सीटें जीतीं।
इससे वह अपने दम पर 71 सीटों के बहुमत के आँकड़े से पीछे रह गई।
अकेली पार्टियों में इंडियन नेशनल कांग्रेस (उर्स) दूसरी सबसे बड़ी पार्टी रही, जिसे 21 सीटें मिलीं।
क्या बदला
फिर भी इसे एकतरफ़ा जीत ही माना गया: इंडियन नेशनल कांग्रेस का अपना समर्थन तेज़ी से गिरा, भले ही नया पक्ष भी अकेले बहुमत तक नहीं पहुँचा।
कांग्रेस की 17 सीटें सीधे इंडियन नेशनल कांग्रेस (उर्स) के पास चली गईं, जो इस चुनाव का सबसे बड़ा बदलाव था।
पूरे राज्य में 140 सीटों में से 75 सीटों पर पिछले चुनाव के मुक़ाबले जीतने वाली पार्टी बदल गई।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला ओल्लूर, केरलम में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 25 वोट रहा।
उस साल सबसे बड़ा जीत का अंतर कोट्टारक्करा, केरलम में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 56.2% वोट आगे रहा।
अरूर, केरलम में लगभग 85.3% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा था।
इस चुनाव में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार इरविपुरम, केरलम में उतरे, बैलट पर 10 उम्मीदवार थे।
पृष्ठभूमि
इसी चुनाव ने केरलम के दो प्रतिद्वंद्वी मोर्चों को उनका आज का रूप दिया।