वाझूर (वाऴूर)विधान सभा चुनाव का परिणाम, 1991
के. नारायण करूप (KEC(M)) ने 1991 के विधान सभा चुनाव में 48.7% वोट पाकर वाझूर (वाऴूर) सीट जीती और कानम राजेंद्रन (CPI) को 2,550 वोटों से हराया। ऴ: तमिल और मलयालम की 'ழ' / 'ഴ' ध्वनि (ल और ड़ के बीच की है)
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1970 में सीट नंबर 88 पाला थी। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 88 देवीकुलम है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। के. नारायण करूप 2.9% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | के. नारायण करूप यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट | यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट | 43,35448.7% |
| 2 | कानम राजेंद्रन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट | लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट | 40,80445.8% |
| 3 | मधुसूदन कुरुप | 3,4853.9% | |
| 4 | राय पराक्कल | 1,2211.4% | |
| 5 | पी.वी. राजप्पन नायर निर्दलीय | निर्दलीय | 1010.1% |
| 6 | विजयकुमारन नायर राघवन निर्दलीय | निर्दलीय | 490.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
KEC(M) और CPI को 95% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.23 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
वाझूर (वाऴूर) से कौन जीता, 1977–2006
KEC(M) ने यह सीट CPI से छीन ली, जिसने इसे 1987 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह KEC(M) की पहली जीत थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1987 के 84.2% से घटकर 74.7% रह गया। इसके बाद 1996 के चुनाव में भी KEC(M) ने यह सीट अपने पास रखी।
- 1977के. नारायण कुरुप (KEC), जीत का अंतर 35.7%
- 1980एम. के. जोसेफ (KEC), जीत का अंतर 19.3%
- 1982कानम राजेंद्रन (CPI), जीत का अंतर 3.8%
- 1987कानम राजेंद्रन (CPI), जीत का अंतर 6.6%
- 1991के. नारायण करूप (KEC(M)), जीत का अंतर 2.9%
- 1996के. नारायण कुरुप (KEC(M)), जीत का अंतर 3.0%
- 2001के. नारायणकुरुप (KEC(M)), जीत का अंतर 7.2%
- 2006जयराजन (KEC(M)), जीत का अंतर 8.1%