त्रिवेंद्रम Iविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1965
बी. माधवन नायर (SSP) ने 1965 के विधान सभा चुनाव में 41.2% वोट पाकर त्रिवेंद्रम I सीट जीती और एम. एन. गोपीनाथन नायर (INC) को 227 वोटों से हराया।
1965 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1960 में कोई सीट नंबर 127 नहीं थी। 1970 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 127 वर्कला है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
त्रिवेंद्रम I का फ़ैसला सिर्फ़ 0.6% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 227 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
5 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | बी. माधवन नायर | 14,86541.2% | |
| 2 | एम. एन. गोपीनाथन नायर | 14,63840.6% | |
| 3 | के. सुकुमारन नायर निर्दलीय | निर्दलीय | 3,71010.3% |
| 4 | के. करुणाकरन वाम दल | वाम दल | 2,5837.2% |
| 5 | जी. वेणुगोपालन निर्दलीय | निर्दलीय | 2600.7% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
SSP, INC और एक निर्दलीय को 92% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.85 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 1977 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 1977 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
त्रिवेंद्रम I से कौन जीता, 1965–1970
इसके बाद 1967 के चुनाव में भी SSP ने यह सीट अपने पास रखी।