देवीकुलमविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1965
जी. वरदन (CPM) ने 1965 के विधान सभा चुनाव में 41.5% वोट पाकर देवीकुलम सीट जीती और टी. मुरुकेसन (INC) को 989 वोटों से हराया।
1965 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1960 में सीट नंबर 77 चित्तूर थी। 1970 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 77 पेरुम्बावूर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। जी. वरदन 2.5% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
5 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | जी. वरदन | 16,47241.5% | |
| 2 | टी. मुरुकेसन | 15,48339.0% | |
| 3 | एस. जी. देवियप्पन KC | KC | 3,6839.3% |
| 4 | के. के. कुंजन निर्दलीय | निर्दलीय | 3,6569.2% |
| 5 | एम. एम. सुंदरम निर्दलीय | निर्दलीय | 4321.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
CPM, INC और KC को 90% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.93 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
देवीकुलम से कौन जीता, 1965–1970
इसके बाद 1967 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।