तेलुगु देशम सत्ता में बनी रही
क्या हुआ
तेलुगु देशम सत्ता में बनी रही और लगभग पिछली बार जैसे ही परिणाम के साथ दोबारा जीती।
तेदेपा ने कुल 294 सीटों में से 202 सीटें जीतीं, यह एकतरफ़ा जीत थी।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 50 सीटें हासिल कीं।
इससे उसे सरकार बनाने के लिए ज़रूरी सीटों से 54 सीटें ज़्यादा मिलीं।
क्या बदला
यह उन कम परिणामों में से था जिनमें पिछले चुनाव से लगभग कुछ नहीं बदला।
तेदेपा फिर जीती और लगातार 2 चुनाव जीत चुकी थी; उसकी सीटों में लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ।
वह 201 सीटों से 202 सीटों पर पहुँची, यानी लगभग पिछली बार जैसा ही परिणाम।
यानी सीटों में सिर्फ़ 1 का बदलाव।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अपने आप में जानने लायक़ हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला श्रीकालहस्ती, आंध्र प्रदेश में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 80 वोट रहा।
दूसरी ओर, उस साल का सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला याकूतपुरा, आंध्र प्रदेश में हुआ, जहाँ जीत 62.9% वोटों के अंतर से हुई।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) चिंतलपूडी, आंध्र प्रदेश में रहा, जहाँ 83.2% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
दूसरी ओर, पाडेरु, आंध्र प्रदेश में सिर्फ़ 32.1% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
पृष्ठभूमि
नई पार्टी के लिए यह पहली परीक्षा थी कि उसकी पहली जीत टिकेगी या नहीं, और मतदाताओं ने उसे फिर सत्ता सौंपी।