छोटा राज्य, जाना-पहचाना विजेता
क्या हुआ
दो हिस्सों में बँटने के बाद राज्य के पहले चुनाव में एक जानी-पहचानी पार्टी सत्ता में लौटी।
तेलुगु देशम ने एक (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) की अगुवाई करते हुए 175 में से 102 सीटें जीतीं।
गठबंधन के अपने साथियों के साथ मिलकर उसके पास कुल 106 सीटें थीं, यानी विधान सभा का 60.6%।
पिछली बार सत्ता में रही इंडियन नेशनल कांग्रेस इस बार ढह गई।
क्या बदला
यह राज्य के बँटवारे के बाद हुआ पहला चुनाव था, ऐसे नक़्शे पर जिसमें सिर्फ़ बचा हुआ इलाक़ा शामिल था।
बड़े नक़्शे पर हुए आख़िरी अविभाजित चुनाव में उसने 294 में से 92 सीटें जीती थीं।
नए सिरे से बने छोटे नक़्शे पर इस बार उसने 175 में से 102 सीटें जीतीं।
नए राज्य में पहली बार सीट जीतने वाले दलों में वाईएसआरसीपी भी थी, जो 67 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला मंगलगिरि, आंध्र प्रदेश में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 12 वोटों से हुआ।
इस चुनाव का सबसे बड़ा (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) पुलिवेंदुला, आंध्र प्रदेश में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 41.5% वोट आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) दर्शी, आंध्र प्रदेश में रहा, 91.5%।
किसी एक सीट पर सबसे ज़्यादा मतदाता गाजुवाका, आंध्र प्रदेश में थे, जहाँ 2,90,224 लोग वोट देने के लिए पंजीकृत थे।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव उस पुनर्गठन के बाद हुआ जिसने पुराने, बड़े राज्य को दो हिस्सों में बाँट दिया।