कांग्रेस ने तेदेपा का शासन ख़त्म किया
क्या हुआ
तेलुगु देशम सत्ता से बाहर हुई; उसे उस प्रतिद्वंद्वी ने हटाया जो कई साल से सत्ता से बाहर था।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 294 सीटों में से 185 सीटें जीतीं।
यह भारी जीत थी — सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 148 सीटों के आँकड़े से काफ़ी आगे।
किसी एक पार्टी के रूप में उसकी सबसे नज़दीकी प्रतिद्वंद्वी, तेदेपा, ढहकर सिर्फ़ 47 सीटों पर रह गई।
क्या बदला
उस झुकाव का बड़ा हिस्सा सीधे उन सीटों में दिखा जो पिछली सत्ताधारी पार्टी के पास थीं।
तेदेपा का साथ देने वाले 115 निर्वाचन क्षेत्र अकेले कांग्रेस की ओर चले गए — इस चुनाव का सबसे बड़ा बदलाव।
एक नई क्षेत्रीय पार्टी भी पहली बार सफल हुई: तेलंगाना राष्ट्र समिति सीट जीतने वाले दलों में शामिल थी, और आगे चलकर जीतने वाले (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) में शामिल हुई।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला लक्सेट्टीपेट, आंध्र प्रदेश में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 166 वोटों से हुआ।
इस चुनाव का सबसे बड़ा (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) चारमीनार, आंध्र प्रदेश में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 60.6% वोट आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) चिंतलपूडी, आंध्र प्रदेश में रहा, 86.7%।
किसी एक सीट पर सबसे ज़्यादा मतदाता खैरताबाद, आंध्र प्रदेश में थे, जहाँ 7,51,715 लोग वोट देने के लिए पंजीकृत थे।
पृष्ठभूमि
इससे वह पुराना सिलसिला जारी रहा जिसमें सत्ता तेलुगु देशम पार्टी और इंडियन नेशनल कांग्रेस के बीच बारी-बारी से बदलती रही है।