आंध्र प्रदेश 1983 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
TDP: 201 सीटें (68.4%)INC: 60 सीटें (20.4%)IND: 19 सीटें (6.5%)CPM: 5 सीटें (1.7%)CPI: 4 सीटें (1.4%)BJP: 3 सीटें (1.0%)ICJ: 1 सीट (0.3%)JNP: 1 सीट (0.3%)बहुमत के लिए 148294सरकार बनाने के लिए 148
  • TDP20168.4%
  • INC6020.4%
  • निर्दलीय196.5%
  • CPM51.7%
  • CPI41.4%
  • BJP31.0%
  • ICJ10.3%
  • JNP10.3%
चुनाव की कहानी

तेलुगु देशम की पहली ही बार में भारी जीत

क्या हुआ

तेलुगु देशम ने अपने पहले ही चुनाव में सत्ता हासिल की; इस भारी जीत से राज्य की लंबे समय से चली आ रही सरकार का दौर ख़त्म हुआ।

उसने कुल 294 सीटों में से 201 सीटें जीतीं।

इससे वह बहुमत के आँकड़े से 53 सीटें आगे रही।

उसकी सबसे नज़दीकी प्रतिद्वंद्वी, इंडियन नेशनल कांग्रेस, 60 सीटें ही जीत पाई।

तेदेपा को 39.0% वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 33.6%; वोटों में कुछ ही प्रतिशत अंकों का फ़र्क़ सीटों में भारी बढ़त में बदल गया।

चुनाव प्रचार

एन. टी. रामा राव ने 29 मार्च 1982 को तेलुगु देशम पार्टी बनाई। जनवरी 1983 के चुनाव में पार्टी ने राज्य की 294 में से 201 विधान सभा सीटें जीतीं, और आंध्र प्रदेश में इंडियन नेशनल कांग्रेस का 27 साल का लगातार शासन ख़त्म हुआ।1

चुनाव से पहले पार्टी ने ग़रीब परिवारों को 2 रुपये किलो चावल और किसानों को 50 रुपये प्रति हॉर्सपावर सालाना की तय दर पर सस्ती बिजली देने के वादों पर प्रचार किया।2

20 सितंबर 1982 से मुख्यमंत्री रहे कोटला विजय भास्कर रेड्डी ने पार्टी के घोषित नेता के रूप में कांग्रेस के प्रचार की अगुवाई की, और येम्मिगनूर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़कर जीते।3

चुनाव मूल रूप से अगस्त में होना था, लेकिन इसे पहले कराया गया: 294 में से 293 सीटों पर 5 जनवरी को मतदान हुआ, और परिणाम 7 जनवरी को घोषित हुए। बाक़ी एक सीट पर मतदान अलग से 27 फ़रवरी को हुआ।4

एन. टी. रामा राव ख़ुद दो निर्वाचन क्षेत्रों, गुडिवाडा और तिरुपति, से खड़े हुए और दोनों जीते; बाद में उन्होंने तिरुपति सीट छोड़ दी।5

स्रोत
  1. 1 wikipedia.org
  2. 2 wikipedia.org
  3. 3 wikipedia.org (1) wikipedia.org (2)
  4. 4 wikipedia.org
  5. 5 wikipedia.org

क्या बदला

यह चुनाव जीतने वाली पार्टी एक साल पहले तक मौजूद ही नहीं थी।

एक ही चुनाव में उसकी सीटें 0 से 201 हो गईं।

राज्य पर शासन कर रही इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) इस दौरान ढह गई।

सबसे बड़ा बदलाव इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) से तेदेपा की ओर रहा: जिन 267 सीटों पर पार्टी बदली, उनमें से 130 इसी तरह बदलीं।

अहम आँकड़े

सबसे कड़ा मुक़ाबला नागरकर्नूल, आंध्र प्रदेश में हुआ, जहाँ 52 वोट रहा।

कोव्वूर, आंध्र प्रदेश उस साल का सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला था, जहाँ जीत कुल वोटों के 66.1% के अंतर से हुई।

सबसे ज़्यादा रायचोटी, आंध्र प्रदेश में रहा, जहाँ 80.5% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।

पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से उंडी, आंध्र प्रदेश सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, जिसकी मतदाता सूची में 5,69,980 नाम थे।

उस साल सबसे ज़्यादा उम्मीदवार रामायमपेट, आंध्र प्रदेश में उतरे, कुल 18।

तेदेपा और भाजपा — इनमें से हर एक ने इस चुनाव में पहली बार आंध्र प्रदेश में विधान सभा सीट जीती।

पृष्ठभूमि

आंध्र प्रदेश 1 नवंबर 1956 को बना, जब आंध्र राज्य को हैदराबाद राज्य के तेलुगु-भाषी ज़िलों के साथ मिलाया गया।6

पूरे आंध्र प्रदेश का पहला संयुक्त चुनाव 1962 में हुआ।6

तब से 1983 में तेदेपा की जीत तक इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) ने राज्य पर बिना रुकावट शासन किया।1

स्रोत
  1. 1 wikipedia.org
  2. 6 wikipedia.org (1) wikipedia.org (2) wikipedia.org (3)

राज्य के आँकड़े पूछें

RBI 2024-25

सभी 294 सीटें