तेलंगाना का अपना पहला मतदान
क्या हुआ
तेलंगाना ने नए विलय के बाद अपना विधान सभा चुनाव कराया, और कांग्रेस ने भारी जीत हासिल की।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 105 सीटों में से 68 सीटें हासिल कीं।
उसे 47.4% वोट मिले।
उसकी सबसे नज़दीकी प्रतिद्वंद्वी पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट थी, यहाँ पहली बार उतरा एक नया मोर्चा, जिसे 22 सीटें मिलीं।
क्या बदला
यह मतदान सिर्फ़ नए विलय हुए तेलंगाना क्षेत्र में हुआ, पूरे आंध्र प्रदेश में नहीं।
इसके कुछ निर्वाचन क्षेत्र बहु-सदस्यीय थे, जहाँ एक ही मुक़ाबले से विधान सभा में एक से ज़्यादा विधायक जाते थे।
85 निर्वाचन क्षेत्रों में से 20 इसी तरह काम करते थे।
इस चुनाव को मिलाकर कांग्रेस यहाँ लगातार 2 चुनाव जीत चुकी थी।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
इस चुनाव का सबसे क़रीबी मुक़ाबला आलमपुर, आंध्र प्रदेश में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 78 वोटों से हुआ।
दूसरी ओर, इस मुक़ाबले का सबसे बड़ा (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सुल्तान बाजार, आंध्र प्रदेश में रहा, जहाँ विजेता 59.7% वोटों से आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) मधिरा, आंध्र प्रदेश में रहा, जहाँ 77.5% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से नागरकर्नूल, आंध्र प्रदेश सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, मतदाता सूची में 1,17,388 नाम थे।
पृष्ठभूमि
यह मतदान सीधे आंध्र प्रदेश के गठन से जुड़ा था, जब तेलंगाना बाक़ी राज्य के साथ जुड़ा।