कांग्रेस को कम अंतर से दूसरा कार्यकाल
क्या हुआ
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश में दूसरा कार्यकाल जीता, हालाँकि पहले के मुक़ाबले कहीं कम बढ़त के साथ।
उसने कुल 294 सीटों में से 156 सीटें हासिल कीं।
इससे वह बहुमत के आँकड़े से 8 सीटें आगे रही।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी तेलुगु देशम 28.1% वोट और 92 सीटों के साथ पीछे रही।
कांग्रेस को ख़ुद 36.5% वोट मिले, जो अपने दम पर फिर सरकार बनाने के लिए काफ़ी थे।
चुनाव प्रचार
फ़िल्म अभिनेता चिरंजीवी ने 26 अगस्त 2008 को तिरुपति की एक जनसभा में प्रजा राज्यम पार्टी शुरू की, और एक नए मध्यमार्गी विकल्प के रूप में चुनावी राजनीति में क़दम रखा।1
तेलुगु देशम पार्टी, तेलंगाना राष्ट्रीय समिति, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने 21 जनवरी 2009 को महा कूटमी बनाई, और नामांकन की आख़िरी तारीख़ से सिर्फ़ लगभग 48 घंटे पहले सीट बँटवारा तय किया।2
महा कूटमी ने 3 अप्रैल 2009 को अपना घोषणापत्र जारी किया, जिसमें हर परिवार को हर महीने 2,000 रुपये नक़द, हर घर को मुफ़्त रंगीन टीवी और तेलंगाना मुद्दे के समाधान का वादा था।3
चिरंजीवी ख़ुद दो सीटों, तिरुपति और पश्चिम गोदावरी ज़िले की पालकोल्लु, से लड़े, और उनकी नई पार्टी ने 294 में से 288 सीटों पर उम्मीदवार उतारे।4
मतदान ख़त्म होने के बाद, 16 मई 2009 को वोटों की गिनती से पहले ही तेलंगाना राष्ट्रीय समिति ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) को समर्थन दे दिया, और अगले महीने महा कूटमी ख़ुद ही भंग हो गया।5
क्या बदला
यह आंध्र प्रदेश की नई सीमाओं पर हुआ पहला चुनाव था, और कांग्रेस फिर जीती, फिर भी उसकी सीटें तेज़ी से घटीं।
सीमाओं का यह नया निर्धारण (सीटों की सीमाओं को सरकारी तौर पर नए सिरे से खींचना, जो भारत की जनसंख्या में बदलाव के साथ समय-समय पर होता है) था।
उसने 156 सीटें जीतीं, जबकि पहले उसके पास 185 सीटें थीं।
नई पार्टी प्रजा राज्यम पार्टी थी, जो पहली बार विधान सभा में पहुँची।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) पहले से 2.7 प्रतिशत अंक बढ़ा — उस समय तक राज्य में दर्ज सबसे ऊँचा।
अहम आँकड़े
सबसे कड़ा मुक़ाबला नेल्लोर शहर, आंध्र प्रदेश में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) 90 वोट रहा।
इस चुनाव का सबसे बड़ा जीत का अंतर बहादुरपुरा, आंध्र प्रदेश में रहा, जहाँ पहले और दूसरे स्थान के बीच 61.4% वोटों का फ़ासला था।
पालेर, आंध्र प्रदेश में किसी भी सीट से ज़्यादा मतदान प्रतिशत दर्ज हुआ, 89.2%।
किसी भी सीट पर सबसे कम मतदान प्रतिशत निजामाबाद (शहरी), आंध्र प्रदेश में दर्ज हुआ, 39.7%।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से लाल बहादुर नगर, आंध्र प्रदेश राज्य का सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, जिसकी मतदाता सूची में 4,12,728 नाम थे।
सबसे ज़्यादा उम्मीदवार ओंगोले, आंध्र प्रदेश में उतरे, बैलट पर 25 नाम थे।
पृष्ठभूमि
आंध्र प्रदेश 1 नवंबर 1956 को बना, जब आंध्र राज्य को हैदराबाद राज्य के तेलुगु-भाषी तेलंगाना ज़िलों के साथ मिलाया गया।6
एन. टी. रामा राव ने 1982 में तेलुगु देशम पार्टी बनाई, और इसने आगे चलकर राज्य में इंडियन नेशनल कांग्रेस का 27 साल का लगातार शासन ख़त्म किया। एनटीआर ने 9 जनवरी 1983 को राज्य के पहले ग़ैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।7