आंध्र प्रदेश 1972 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
INC: 219 सीटें (76.3%)IND: 57 सीटें (19.9%)CPI: 7 सीटें (2.4%)SWA: 2 सीटें (0.7%)CPM: 1 सीट (0.3%)STS: 1 सीट (0.3%)बहुमत के लिए 144287सरकार बनाने के लिए 144
  • INC21976.3%
  • निर्दलीय5719.9%
  • CPI72.4%
  • SWA20.7%
  • CPM10.3%
  • STS10.3%
चुनाव की कहानी

कांग्रेस की जीत का सिलसिला जारी

क्या हुआ

इंडियन नेशनल कांग्रेस ने राज्य विधान सभा पर अपनी पकड़ बनाए रखी और सत्ता के लिए किसी असली मुक़ाबले के बिना एक और कार्यकाल जीता।

कांग्रेस ने कुल 287 सीटों में से 219 सीटें जीतीं।

उसे सबसे नज़दीकी टक्कर निर्दलीय के उम्मीदवारों से मिली, जिन्होंने मिलकर 57 सीटें जीतीं।

क्या बदला

इस चुनाव से कांग्रेस का लंबा, अटूट सिलसिला आगे बढ़ा; पिछले कई चुनावों में उसे एक भी हार नहीं मिली थी।

इसके साथ राज्य में पार्टी लगातार 5 चुनाव जीत चुकी थी, और वहाँ यह उसकी अब तक की सबसे ज़्यादा सीटें थीं।

उस साल की 17 सीटों पर निर्विरोध जीत हुई — ऐसी सीटें जहाँ सिर्फ़ एक उम्मीदवार खड़ा था, इसलिए फ़ैसले के लिए मतदान की ज़रूरत नहीं पड़ी।

अहम आँकड़े

उस चुनाव के कुछ आँकड़े अपने आप में जानने लायक़ हैं।

सबसे कड़ा मुक़ाबला पोदिली, आंध्र प्रदेश में हुआ, जहाँ सिर्फ़ 125 वोट रहा।

दूसरी ओर, उस साल का सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला मंथनी, आंध्र प्रदेश में हुआ, जहाँ जीत 83.7% वोटों के अंतर से हुई।

सबसे ज़्यादा उय्यूरु, आंध्र प्रदेश में रहा, जहाँ 82.1% मतदाताओं ने वोट डाला।

उस साल सबसे भरा मतपत्र भी छोटा ही था: सबसे ज़्यादा उम्मीदवार तुंगतुर्थी, आंध्र प्रदेश में थे, कुल मिलाकर सिर्फ़ 9।

पृष्ठभूमि

यह चुनाव एक अपेक्षाकृत नए राज्य में हुआ, जो तेलुगु-भाषी इलाक़ों को एक विधान सभा के तहत जोड़कर बना था।

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RBI 2024-25

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