आंध्र प्रदेश 1962 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
INC: 177 सीटें (59.0%)CPI: 51 सीटें (17.0%)IND: 51 सीटें (17.0%)SWA: 19 सीटें (6.3%)SOC: 2 सीटें (0.7%)बहुमत के लिए 151300सरकार बनाने के लिए 151
  • INC17759.0%
  • CPI5117.0%
  • निर्दलीय5117.0%
  • SWA196.3%
  • SOC20.7%
चुनाव की कहानी

आंध्र प्रदेश का पहला संयुक्त चुनाव

क्या हुआ

पूरे आंध्र प्रदेश में एक साथ हुए पहले चुनाव में कांग्रेस ने आराम से बहुमत हासिल किया।

इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 300 सीटों में से 177 सीटें हासिल कीं।

यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 26 सीटें ज़्यादा था।

उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय 51 सीटों के साथ बहुत पीछे रही।

क्या बदला

यह पहली बार था जब आंध्र और तेलंगाना दोनों के मतदाताओं ने एक साझा राज्य विधान सभा के लिए वोट डाले।

इस चुनाव को मिलाकर कांग्रेस यहाँ लगातार 3 चुनाव जीत चुकी थी।

कुल 5 दलों ने सीटें जीतीं, और 51 और सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के हिस्से गईं।

एक नई रूढ़िवादी विपक्षी पार्टी ने भी यहाँ पहली बार सीटें जीतीं।

अहम आँकड़े

उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।

इस चुनाव का सबसे क़रीबी मुक़ाबला जनगांव, आंध्र प्रदेश में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 11 वोटों से हुआ।

दूसरी ओर, इस चुनाव का सबसे बड़ा डोन, आंध्र प्रदेश में रहा, जहाँ विजेता 82.5% वोटों से आगे रहा।

सबसे ज़्यादा मुदिनेपल्ली, आंध्र प्रदेश में रहा, जहाँ 85.1% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।

पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से नरसरावपेट, आंध्र प्रदेश सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, मतदाता सूची में 85,187 नाम थे।

पृष्ठभूमि

इस चुनाव से वह संयुक्त विधान सभा पूरी हुई, जिसे बनाना आंध्र प्रदेश के गठन का मक़सद था।

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