राजमपेटविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1972
रत्ना सभापति बंडारु (SWA) ने 1972 के विधान सभा चुनाव में 44.7% वोट पाकर राजमपेट सीट जीती और प्रब अवथम्मा कोंडुरु (निर्दलीय) को 1,898 वोटों से हराया।
1972 के चुनाव के लिए कुछ सीटों के नंबर बदले गए। 1967 में सीट नंबर 151 कडप्पा थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1978 से सीट नंबर 151 का नाम अब भी राजमपेट है, अब नई सीमाओं के साथ। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। रत्ना सभापति बंडारु 3.1% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
4 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | रत्ना सभापति बंडारु महागठबंधन | महागठबंधन | 27,61944.7% |
| 2 | प्रब अवथम्मा कोंडुरु निर्दलीय | निर्दलीय | 25,72141.6% |
| 3 | कसाला शिवरामय्या कांग्रेस (आर) | कांग्रेस (आर) | 8,11413.1% |
| 4 | एम. लक्ष्मम्मा MIL | MIL | 3140.5% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
SWA, एक निर्दलीय और INC को 99% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.56 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।